---Advertisement---

डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी: पीलिया – लीवर की चेतावनी और स्वास्थ्य का संकेत |

---Advertisement---

आगरा, 17 जनवरी 2026:
पीलिया एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसे चिकित्सा भाषा में जॉन्डिस (Jaundice) कहा जाता है। डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी ने बताया कि यह स्वयं कोई बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर के भीतर चल रही किसी गड़बड़ी — विशेषकर लीवर से जुड़ी समस्या — का संकेत है।

पीलिया होने पर व्यक्ति की आँखों की सफेदी, त्वचा और कभी-कभी नाखून पीले दिखाई देने लगते हैं। इसका मुख्य कारण शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ का असामान्य रूप से बढ़ जाना है। बिलीरुबिन एक पीला रंगद्रव्य होता है, जो लाल रक्त कणिकाओं के टूटने पर बनता है और सामान्य स्थिति में यकृत (लीवर) द्वारा पित्त के साथ बाहर निकाल दिया जाता है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तब पीलिया उत्पन्न होता है।

डॉ. अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि पीलिया के मुख्य कारणों में लीवर से जुड़ी बीमारियाँ, पित्त नलिकाओं में रुकावट और रक्त संबंधी विकार शामिल हैं। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई जैसे वायरस, शराब का अत्यधिक सेवन, फैटी लीवर और लीवर सिरोसिस लीवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, पित्त नलिकाओं में पथरी, सूजन या ट्यूमर से भी पीलिया हो सकता है।

उन्होंने आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी प्रकाश डाला और कहा कि आयुर्वेद में पीलिया को “कामला रोग” कहा जाता है, जिसे पित्त दोष की विकृति माना जाता है। अधिक तैलीय, मसालेदार, तला-भुना भोजन, शराब, क्रोध, तनाव और अनियमित दिनचर्या पित्त को बढ़ाकर पीलिया का कारण बनते हैं।

पीलिया के सामान्य लक्षणों में त्वचा व आँखों का पीला पड़ना, भूख न लगना, कमजोरी, थकान, मतली, उल्टी, पेट दर्द, बुखार और वजन कम होना शामिल हैं। कई बार खुजली भी होती है, जो पित्त के रक्त में जमा होने के कारण होती है।

डॉ. मीना अग्रवाल ने पीलिया से बचाव के लिए स्वच्छ भोजन व पानी का सेवन, शराब से दूरी, बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएँ न लेना, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जाँच की सलाह दी। उन्होंने कहा, “पीलिया शरीर की एक चेतावनी है। इसके कारणों को समझकर, सही समय पर उपचार और जीवनशैली में सुधार करके इस रोग से बचा जा सकता है।”

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---
Rajesh