आगरा, 30 दिसंबर 2025:
नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डॉ. मीना अग्रवाल ने कहा है कि कब्ज आज के समय में सबसे अधिक प्रचलित पर गंभीरता से लिए जाने वाले स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। उन्होंने चेतावनी दी कि कब्ज की दवाओं पर निर्भरता न केवल आंतों की प्राकृतिक क्रियाशीलता को कमजोर करती है, बल्कि शरीर में विषाक्तता फैलाकर कई अन्य रोगों को जन्म देती है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में लोग फल, सब्जियां और पूर्ण अनाज जैसे प्राकृतिक आहार से दूर होते जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप आंतों में अपशिष्ट पदार्थों का समय पर निष्कासन नहीं हो पाता, जिससे मल सड़ने लगता है और शरीर में गैस, सिरदर्द, नींद की कमी, भूख में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कब्ज की दवाएं केवल अस्थायी राहत देती हैं। ये दवाएं आंतों में जलन पैदा करके पानी खींचती हैं, जिससे मल बाहर आ जाता है। लेकिन लगातार दवा के उपयोग से आंतों की प्राकृतिक गतिविधि धीमी पड़ जाती है और व्यक्ति और अधिक शक्तिशाली दवाओं की ओर आकर्षित होता है।
डॉ. अग्रवाल ने सुझाव दिया कि कब्ज से छुटकारा पाने के लिए “शौचालय नहीं, भोजनालय में बदलाव लाना चाहिए।” उन्होंने सलाह दी कि लोग चोकर युक्त आटा, भूसी युक्त चावल, ताजे फल और कच्ची सब्जियां जैसे खीरा, ककड़ी, गाजर, टमाटर, पालक और पत्तागोभी का सेवन करें। उन्होंने बताया कि दिनभर में केवल 300 ग्राम कच्ची सब्जियां भी पर्याप्त हैं, बशर्ते वे विविधता के साथ और नींबू-नमक के साथ ली जाएं।
डॉ. मीना अग्रवाल ने याद दिलाया कि प्रकृति ने मानव शरीर को इतनी क्षमता प्रदान की है कि यदि सही आहार लिया जाए, तो कब्ज जैसी समस्या स्वतः समाप्त हो जाती है। उनका कहना है – “स्वास्थ्य ही सच्चा धन है।”