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2005 ज्ञानवापी उपद्रव मामले में 14 आरोपी दोषमुक्त, 21 साल बाद मिला न्याय |

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वाराणसी, तृप्ति प्रमाण: वर्ष 2005 में वाराणसी के ज्ञानवापी में हुए उपद्रव मामले में 21 साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में सभी 14 आरोपियों को दोषमुक्त करार दे दिया है। इनमें वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर गिरी और गुलशन कपूर समेत 7 हिंदू नेता और 9 मुस्लिम व्यापारी शामिल थे।

2005 में हुआ था पूरा मामला

यह घटना 2 सितंबर 2005 की है, जब तत्कालीन सपा शासन में जुमे की नमाज के दौरान मौलाना बातिन की स्वास्थ्य जांच को लेकर हुई कहासुनी बड़े उपद्रव में बदल गई थी। इस दौरान सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा था। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तत्कालीन सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रहने के बाद अपनी छवि बचाने के लिए निर्दोष व्यापारियों और राजनीतिक नेताओं को इस मामले में फंसाया था।

लंबी चली कानूनी और राजनीतिक लड़ाई

इस मामले में 21 वर्षों तक लंबी कानूनी लड़ाई चली। इस दौरान मस्जिद इंतजामिया कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस सरकार और राज्य की सपा सरकार से कई बार मुलाकातें कीं। नेताओं ने सोनिया गांधी, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से भी मुलाकात कर मुकदमा वापस लेने का आश्वासन मांगा था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अदालत ने दिए दोषमुक्त करने के आदेश

सरकारों से निराश होने के बाद, मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने वाराणसी के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी के माध्यम से अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखा। उनके साथ अधिवक्ता गुलाम गौश खान और अधिवक्ता आशिफ उमर ने भी पैरवी की। वकीलों के तर्कों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने सभी 14 आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश दिया।

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Rajesh