एआई हिंदी को समझ रहा, कर रहा संवाद और अनुवाद: प्रो. अविनाश |

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जनसंचार के विस्तार से हिंदी पत्रकारिता के लिए बढ़े अवसर, डिजिटल युग में वैश्विक स्तर पर बढ़ी हिंदी की पहुंच

जौनपुर। हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में हिंदी भाषा की वर्तमान प्रासंगिकता और डिजिटल युग में हिंदी के बढ़ते प्रभाव को लेकर गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के बदलते स्वरूप, तकनीक से उसके जुड़ाव और पत्रकारिता में उसकी भूमिका पर विचार रखे।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी हिंदी में संवाद करने में सक्षम: प्रो. अविनाश

प्रबंध अध्ययन संकाय के अध्यक्ष प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने कहा कि वर्तमान दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई भी हिंदी भाषा को समझने के साथ हिंदी में संवाद, अनुवाद और लेखन करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि एआई हिंदी में आवाज की पहचान करने और जवाब देने की क्षमता भी रखता है।

उन्होंने कहा कि हिंदी सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, संवेदना और सामाजिक विविधता को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से हिंदी पत्रकारिता को नए अवसर: प्रो. मनोज मिश्रा

जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज मिश्रा ने कहा कि जनसंचार के विस्तार ने हिंदी पत्रकारिता के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

उन्होंने कहा कि आज हिंदी का पाठक वर्ग केवल समाचार पत्रों तक सीमित नहीं है। मोबाइल फोन और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी हिंदी पाठकों की सक्रियता लगातार बढ़ी है। इससे हिंदी पत्रकारिता के सामने नए माध्यम और संभावनाएं खुली हैं।

विज्ञान और तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने में हिंदी की अहम भूमिका

विज्ञान संकाय के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार ने कहा कि विज्ञान और तकनीकी विषयों को आम आदमी तक पहुंचाने में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विज्ञान से जुड़ी बड़ी मात्रा में सामग्री हिंदी में तैयार की गई है, जिससे जटिल विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।

डिजिटल क्रांति ने हिंदी को वैश्विक मंच तक पहुंचाया: डॉ. सुनील कुमार

जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि डिजिटल क्रांति ने हिंदी भाषा को अभूतपूर्व विस्तार दिया है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हिंदी की पहुंच वैश्विक स्तर तक बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि भाषा का विस्तार तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसके साथ पत्रकारिता की विश्वसनीयता, तथ्य-जांच और सामाजिक जिम्मेदारी भी मजबूत हो। उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से हिंदी की समृद्ध शब्द-संपदा के साथ नई मीडिया तकनीकों में दक्षता हासिल करने का आह्वान किया।

डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया संचालन

कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

संवाददाता: शम्भू विश्वकर्मा, जौनपुर
तृप्ति प्रमाण न्यूज

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