अक्सर लोग कमर और पैरों के दर्द को थकान या उम्र बढ़ने का परिणाम मान लेते हैं। लेकिन नेचुरोपैथ डॉ. मीना अग्रवाल के अनुसार, जब कमर का दर्द पैरों तक फैलता है, तो यह शरीर द्वारा भेजा गया एक स्पष्ट संकेत है कि कहीं न कहीं आंतरिक असंतुलन है—जो या तो वात दोष की वृद्धि है या नसों के दबाव (न्यूरोलॉजिकल कंप्रेशन) का संकेत।
डॉ. अग्रवाल बताती हैं कि आधुनिक जीवनशैली, जैसे लंबे समय तक बैठे रहना, गलत मुद्रा में मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग, शारीरिक गतिविधि की कमी और मानसिक तनाव—ये सभी कारक वात दोष को बढ़ाकर कमर व पैरों में दर्द का कारण बनते हैं।
दर्द की प्रकृति बताती है मूल समस्या
अधिकांश मामलों में दर्द कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर जांघ, घुटने या तलवे तक पहुँच जाता है। कुछ लोगों को इसे खींचने जैसा लगता है, तो कुछ को बिजली के झटके जैसा अनुभव होता है। डॉ. अग्रवाल कहती हैं कि यदि दर्द के साथ झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो रही हो, तो यह नस दबने (सायटिका या डिस्क प्रॉब्लम) का संकेत हो सकता है।
वात-कफ असंतुलन के कारण
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, कमर-पैर दर्द मुख्यतः वात दोष से जुड़ा है। वात बढ़ने पर नसों में सूखापन और संवेदनशीलता आ जाती है। यदि सुबह को अकड़न या सूजन भी महसूस हो, तो इसमें कफ दोष का योगदान हो सकता है।
दैनिक जीवन में सावधानियाँ
- लंबे समय तक एक ही मुद्रा में न बैठें
- भारी वजन अचानक न उठाएँ
- बहुत मुलायम या सख्त गद्दे पर न सोएँ
- ठंडी हवा और रात को देर तक जागने से बचें
प्राकृतिक उपचार
- रात को गुनगुने तिल या नारायण तेल से हल्की मालिश
- मालिश के बाद गर्म पानी की बोतल से सेक
- हल्का, गर्म और सुपाच्य भोजन
- दही, केला, बासी व ठंडा भोजन सीमित करें
डॉ. अग्रवाल चेतावनी देती हैं कि यदि दर्द बढ़ रहा हो, या घरेलू उपायों से आराम न मिले, या जलन, कमजोरी या गतिहीनता आ रही हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।
उनका कहना है:
“कमर और पैरों का दर्द शरीर की एक चेतावनी है। इसे नजरअंदाज करना या केवल दर्दनाशक गोलियों पर निर्भर रहना समस्या को गहरा कर सकता है। जीवनशैली में सुधार और प्राकृतिक देखभाल से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।”