आगरा, 16 दिसंबर 2025
महिलाओं की शारीरिक, मानसिक और प्रजनन स्वास्थ्य की नींव पोषण पर टिकी होती है। लेकिन व्यस्त जीवनशैली, पारिवारिक दबाव और स्वयं की देखभाल की उपेक्षा के कारण यह आधार कमजोर पड़ जाता है। नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डॉ. मीना अग्रवाल कहती हैं – “महिलाओं की शक्ति उनके शरीर की धातुओं की मजबूती से निकलती है। जब रक्त, हड्डियाँ, ऊर्जा और प्रजनन तंत्र संतुलित होते हैं, तभी महिलाएं न केवल परिवार का बल्कि समाज का भी सहारा बन सकती हैं।”
डॉ. अग्रवाल बताती हैं कि महिलाओं में लौहतत्व (iron), कैल्शियम, विटामिन D, B12, ओमेगा-3 और फोलेट जैसे पोषक तत्वों की कमी बहुत आम है, जो धीरे-धीरे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है। बाल झड़ना, त्वचा का फीकापन, अनियमित पीरियड्स, थकान और हड्डियों में दर्द – ये सभी पोषण की कमी के संकेत हैं।
आयुर्वेद और नेचुरोपैथी के अनुसार, अग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर होने से शरीर पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाता। इसलिए केवल अच्छा खाना नहीं, बल्कि सही भोजन, सही मात्रा और सही समय ज़रूरी है। डॉ. अग्रवाल घरेलू उपायों पर जोर देती हैं – जैसे खाली पेट किशमिश-अंजीर, गुड़-तिल, चुकंदर-गाजर का सलाद, अश्वगंधा-शतावरी युक्त दूध और ताज़ी, गरम भोजन का सेवन।
हड्डियों के लिए सुबह की धूप, हार्मोन बैलेंस के लिए फ्लैक्स व पंपकिन सीड्स, और खून बढ़ाने के लिए लौहयुक्त आहार – ये सभी आसान लेकिन प्रभावी उपाय हैं। साथ ही, नियमित योग, 20 मिनट की वॉक, पूरी नींद और प्रोसेस्ड फूड से बचाव भी अहम है।
डॉ. अग्रवाल कहती हैं – “महिलाएं दूसरों को पोषित करती हैं, लेकिन अपने शरीर को अक्सर अनदेखा कर देती हैं। जब आप मजबूत होंगी, तभी आपका परिवार और समाज स्वस्थ रहेगा। संतुलित अग्नि और शांत मन ही असली पोषण है।”
फेसबुक पोस्ट के लिए (सहित हैशटैग्स):
महिलाओं की शक्ति पोषण से बढ़ती है! 💪
एनीमिया, कैल्शियम की कमी, अनियमित पीरियड्स – ये सब पोषण की कमी के संकेत हैं।
डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी विशेषज्ञ (आगरा) बता रही हैं आयुर्वेदिक और प्राकृतिक तरीकों से महिलाओं के स्वास्थ्य को कैसे संतुलित किया जाए।
घर का बना खाना, गुड़-तिल, ताज़ी हरी सब्ज़ियां, धूप और नींद – ये छोटी आदतें बड़ा बदलाव लाती हैं!