आगरा, 20 दिसंबर 2025: नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डॉ. मीना अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि मुंह सूखना (Dry Mouth या Xerostomia) अक्सर लोगों द्वारा सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वे कहती हैं कि यह केवल डिहाइड्रेशन या मौसम बदलाव का परिणाम नहीं, बल्कि वात-पित्त असंतुलन, अग्नि दोष और रस धातु की कमी का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
डॉ. अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि लार केवल भोजन के पाचन में सहायता ही नहीं करती, बल्कि दांतों की सुरक्षा, मुंह के संक्रमणों से बचाव और स्वाद अनुभव के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने संदर्भ देते हुए कहा कि चरक संहिता में रस धातु की क्षीणता को मुख शोष (मुंह सूखना) का मूल कारण बताया गया है।
🔍 मुख्य कारण:
आधुनिक कारण: डिहाइड्रेशन, चाय-कॉफी का अधिक सेवन, तनाव, नींद की कमी, कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: वात दोष की वृद्धि, पित्त प्रकोप, अग्नि दोष और ओज क्षय।
🩺 लक्षण:
बार-बार पानी पीने की इच्छा
मुंह से दुर्गंध
जीभ या होंठों में रूखापन
बोलते समय गले का सूखना
स्वाद में कमी
🌿 7 प्रभावी नेचुरोपैथिक उपचार:
घृत पान: सुबह खाली पेट ½ चम्मच देशी घी गुनगुने पानी के साथ।
मुलेठी चूर्ण: शहद के साथ धीरे-धीरे चूसें।
तिल तेल का ऑयल पुलिंग: 5-7 मिनट तक मुंह में घुमाएं।
आंवला रस: दिन में 20-30 ml ताजा रस लें।
सौंफ-धनिया पानी: रात भर भिगोकर सुबह पिएं।
नस्य कर्म: गाय के घी की 2 बूंदें सुबह नाक में।
शीतल आहार: नारियल पानी, दूध, खीरा व गुलकंद का सेवन।
💡 Rare Facts:
लार की कमी से मुंह के बैक्टीरिया 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं।
रात में मुंह सूखना डायबिटीज़ या स्लीप एपनिया का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
कुछ दवाएं (BP, एंटी-डिप्रेसेंट्स, एलर्जी की दवाएं) लार स्राव को कम करती हैं।
बुजुर्गों में यह सामान्य नहीं, बल्कि चेतावनी का संकेत है।
डॉ. मीना अग्रवाल ने सलाह दी कि मुंह सूखने को हल्के में न लें। यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो आयुर्वेदिक या नेचुरोपैथिक विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।