नायगांव में रियल एस्टेट फ्रॉड: लीगल गाला देने के नाम पर बिल्डर ने की 17.65 लाख की धोखाधड़ी, सागर डेवलपर्स पर FIR दर्ज |

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वसई: पालघर जिले के नायगांव पूर्व स्थित चिंचोटी इलाके से रियल एस्टेट सेक्टर में जालसाजी का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक बिल्डर और उसके सहयोगियों पर प्लॉट और गाला (इंडस्ट्रियल/कमर्शियल स्पेस) निर्माण के नाम पर एक ग्राहक से 17 लाख 65 हजार रुपये की भारी-भरकम ठगी करने का आरोप लगा है। पीड़ित की शिकायत के बाद नायगांव पुलिस ने मेसर्स सागर डेवलपर्स के पार्टनर्स के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

1000 वर्ग फुट के लीगल गाला का झांसा देकर वसूले लाखो रुपये

पुलिस विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विरार पूर्व के रहने वाले अजय रंगराव पाटिल (40) ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित के अनुसार, जून 2019 से जनवरी 2021 के बीच मेसर्स सागर डेवलपर्स के पार्टनर यूसुफ कुरैशी और उसके अन्य सहयोगियों ने उनसे संपर्क किया था। आरोपियों ने चिंचोटी स्थित सर्वे नंबर 31/2/1 की जमीन पर 1000 वर्ग फुट का कार्पेट एरिया वाला पूरी तरह से कानूनी (लीगल) गाला बनाकर देने का भरोसा दिया। इस सौदे के एवज में बिल्डर ने पीड़ित से नकद (कैश) और चेक के माध्यम से कुल 17.65 लाख रुपये ले लिए।

एग्रीमेंट में कर दी हेराफेरी, खुली जगह का थमा दिया दस्तावेज

ठगी का यह खेल तब सामने आया जब 4 जनवरी 2021 को इस सौदे का आधिकारिक रूप से पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराया गया। पीड़ित का आरोप है कि रजिस्टर्ड दस्तावेजों में बिल्डर ने वादे के मुताबिक 1000 वर्ग फुट का निर्मित गाला देने के बजाय चालाकी से केवल 1482 वर्ग फुट की खुली जगह (ओपन स्पेस) का उल्लेख कर दिया। इसके अलावा, डेवलपर्स ने इस प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय प्रशासन से कोई आवश्यक अनुमति भी नहीं ली थी और न ही पीड़ित को उनका तयशुदा गाला सौंपा गया।

कई अन्य खरीदार भी बने जालसाजी का शिकार, पुलिस जांच तेज

पीड़ित अजय पाटिल ने पुलिस को बताया कि आरोपी यूसुफ कुरैशी और उसके साथियों ने केवल उनके साथ ही नहीं, बल्कि उस हाउसिंग/कमर्शियल सोसायटी के कई अन्य खरीदारों और जमीन मालिकों के साथ भी इसी तरह की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।

मामले की प्राथमिक जांच पूरी करने के बाद नायगांव पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465, 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज बनाना और इस्तेमाल करना) और 34 के तहत अपराध क्रमांक 672/2026 दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जा रही है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।

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