मतदाता संख्या में बढ़ोतरी पर मनोज बारोट का हितेंद्र ठाकुर से सवाल, बोले—जांच का पैमाना एक जैसा हो |

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नालासोपारा में 2009 से 2026 तक मतदाताओं की संख्या में वृद्धि के आंकड़े पेश कर भाजपा जिला महामंत्री ने उठाए सवाल; SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची की स्वतंत्र जांच की मांग

नालासोपारा | नटवर झा। नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की बढ़ती संख्या और चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा जिला महामंत्री मनोज बारोट ने पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर से सवाल किया है कि यदि 2024 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि पर संदेह जताया जा रहा है, तो 2026 के महानगरपालिका चुनाव से पहले मतदाताओं की संख्या में हुई बढ़ोतरी को किस आधार पर देखा जा रहा है?

बारोट ने प्रेस वार्ता में नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2009 से अब तक मतदाताओं की संख्या में हुई वृद्धि के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता संख्या में बढ़ोतरी की जांच चुनावी जीत या हार के आधार पर अलग-अलग तरीके से नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी चुनावों के लिए समान मानदंड और साक्ष्य लागू किए जाने चाहिए।

2009 से 2024 तक मतदाताओं की संख्या में वृद्धि

बारोट द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या वर्ष-दर-वर्ष बढ़ी है। आंकड़ों में क्षितिज ठाकुर को मिले मतों का विवरण भी शामिल है।

विधानसभा चुनावकुल मतदातापिछले दर्ज आंकड़े से वृद्धिक्षितिज ठाकुर को मिले वोट
20093,51,555—89,284
20143,96,24044,6851,13,566
20195,19,1601,22,9201,49,868
20246,08,60989,4491,28,238

इन आंकड़ों के मुताबिक, 2009 से 2019 के बीच क्षितिज ठाकुर को मिले मतों में 60 हजार से अधिक की वृद्धि हुई। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राजन नाइक ने क्षितिज ठाकुर को पराजित किया।

2024 और 2026 के मतदाता आंकड़ों पर सवाल

बारोट के अनुसार, वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में नालासोपारा क्षेत्र में कुल 6,08,609 मतदाता थे, जबकि 2026 के महानगरपालिका चुनाव से पहले यह संख्या बढ़कर 6,53,498 हो गई। इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच 44,889 मतदाताओं का अंतर बताया गया है।

बारोट ने सवाल उठाया कि मतदाताओं की संख्या में वृद्धि को लेकर संदेह जताने का आधार क्या है और क्या इसकी जांच सभी चुनावों के आंकड़ों को एक समान मानदंड पर रखकर की जानी चाहिए?

उन्होंने कहा कि 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद मतदाता संख्या को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि 2026 के महानगरपालिका चुनाव में बहुजन विकास आघाड़ी की जीत हुई। उनके मुताबिक, मतदाता सूची की जांच किसी दल की जीत या हार से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

आबादी बढ़ने के साथ मतदाताओं की संख्या बढ़ने का भी तर्क

बारोट ने कहा कि पिछले 17 वर्षों में नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में करीब तीन लाख की वृद्धि हुई है। उन्होंने पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर के उस कथित पूर्व बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें वसई-विरार क्षेत्र को तेजी से बढ़ने वाला इलाका बताया गया था।

बारोट का सवाल है कि जब क्षेत्र में आबादी बढ़ती है, तो मतदाताओं की संख्या में वृद्धि होना स्वाभाविक रूप से संभव है। हालांकि, मतदाताओं की संख्या में वास्तविक वृद्धि और मतदाता सूची में संभावित त्रुटियों के बीच अंतर समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों और दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

2024 में तीन सीटों पर बहुजन विकास आघाड़ी को हार

खबर में दिए गए विवरण के अनुसार, 2024 के विधानसभा चुनाव में बहुजन विकास आघाड़ी को वसई, नालासोपारा और बोइसर—तीनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। हितेंद्र ठाकुर वसई से, क्षितिज ठाकुर नालासोपारा से और बहुजन विकास आघाड़ी के राजेश पाटिल बोइसर से चुनाव हार गए थे।

बारोट ने चुनावी नतीजों और मतदाता संख्या में बदलाव को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच समान जांच मानदंड अपनाने पर जोर दिया।

SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटने की शिकायतें

बारोट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लागू करने के संबंध में गंभीर शिकायतें होने की बात भी कही। उनके अनुसार, 28 सितंबर को चुनाव अधिकारियों को पत्र भेजकर शिकायतों की जांच की मांग की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वर्षों से क्षेत्र में रह रहे पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं।

बारोट ने यह भी कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में महानगरपालिका के कर्मचारियों की भूमिका और महानगरपालिका में बहुजन विकास आघाड़ी के लंबे समय से प्रभाव को देखते हुए, घर-घर जाकर सत्यापन, अनुपस्थित या स्थानांतरित मतदाताओं के रिकॉर्ड और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए शिकायतों, संबंधित रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फॉर्म नंबर 6 में बदलाव का सुझाव

बारोट ने महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से केंद्रीय निर्वाचन आयोग को फॉर्म नंबर 6 में बदलाव का सुझाव दिए जाने का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य ऐसे नागरिकों को दोबारा पंजीकरण के दौरान होने वाली परेशानी से बचाना है, जो पहले मतदाता के रूप में पंजीकृत थे, लेकिन SIR प्रक्रिया के बाद उनके नाम सूची से बाहर हो गए।

उन्होंने बताया कि पिछले मतदाता पहचान पत्र नंबर का उल्लेख करने की सुविधा देने का सुझाव भी दिया गया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य पुनः पंजीकरण के दौरान पहले से पंजीकृत नागरिकों की स्थिति स्पष्ट करने में मदद करना बताया गया है।

“आरोप और जांच दोनों सिलेक्टिव नहीं होने चाहिए”

मनोज बारोट ने कहा कि मतदाता सूची में गलतियों पर सवाल उठाना जरूरी है। उनके मुताबिक, अयोग्य व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर नहीं होना चाहिए।

उन्होंने जोर दिया कि मतदाता संख्या में वृद्धि को लेकर आरोप केवल चुनावी नतीजों के आधार पर नहीं लगाए जाने चाहिए। बारोट ने 2009 से अब तक के सभी चुनावों की मतदाता सूचियों की एक समान मानदंड और साक्ष्यों के आधार पर जांच करने की मांग की।

संवाददाता: नटवर झा
तृप्ति प्रमाण न्यूज़ पोर्टल

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