तृप्ति प्रमाण ब्यूरो,चीफ विनोद प्रसाद पटना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan Samman Nidhi) में पारदर्शिता लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। बिहार में पीडीएस और पीएम-किसान योजना के आधार डाटाबेस के मिलान के दौरान करीब 2.45 लाख ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्य योजना का लाभ ले रहे थे।
केंद्र सरकार ने नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए इन सभी संदिग्ध मामलों में तत्काल भुगतान रोकने के निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही, राज्य सरकार को इन मामलों की गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है।
जिला स्तर पर शुरू हुई जांच प्रक्रिया
इस कार्रवाई के तहत संदिग्ध लाभुकों की विस्तृत सूची सभी जिलों को भेज दी गई है। राज्य कृषि विभाग ने जिला कृषि पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर इन मामलों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) सुनिश्चित करें। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि वास्तविक पात्र किसान कौन हैं और किन मामलों में अनियमितता बरती गई है।
आधार सीडिंग नहीं होने पर भी लग सकती है रोक
राज्य में 1 लाख 30 हजार 308 ऐसे किसान भी चिह्नित किए गए हैं, जिनकी आधार सीडिंग और NPCI प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ये किसान समय पर अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं, तो उनके अगले किस्त के भुगतान पर भी रोक लगाई जा सकती है। इसको देखते हुए जिला स्तर पर किसानों को जागरूक करने और आवश्यक दस्तावेज जमा कराने में सहायता करने पर जोर दिया जा रहा है।
4.63 लाख लाभुकों का लंबित है सत्यापन
केंद्र सरकार ने राज्य को 4 लाख 63 हजार 341 ऐसे लाभुकों की सूची भी सौंपी है, जिनका अभी तक भौतिक सत्यापन नहीं हो पाया है। इनमें वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लाभुक शामिल हैं। विभाग ने एक महीने के भीतर ‘PM-Kisan GOI’ ऐप के माध्यम से इन सभी का सत्यापन पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
योजना की वर्तमान स्थिति
फिलहाल, बिहार राज्य में 73.34 लाख से अधिक किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे हैं। इस योजना के तहत पात्र किसानों को वार्षिक 6,000 रुपये की राशि तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। अब तक योजना की 22 किस्तों का भुगतान किया जा चुका है।
जांच विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताजा कार्रवाई योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी लाभुकों को हटाकर योजना का वास्तविक लाभ असली और पात्र किसानों तक पहुंचाना है।