तृप्ति प्रमाण न्यूज़ पोर्टल, पटना ब्यूरो
रिपोर्ट: विनोद प्रसाद
पटना। बिहार में जैविक कृषि को बढ़ावा देने और किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आज कृषि भवन, पटना के ऑडिटोरियम में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता कृषि विभाग, बिहार के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने की।
प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने अपने संबोधन में कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से उगाए गए अनाज एवं फल-सब्जियां स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक ऐसे उत्पादों के सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि बिहार सरकार का लक्ष्य किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करना है, ताकि उपभोक्ताओं को शुद्ध और प्रमाणित जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें। जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रयास किए जाएंगे।
कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जिलों से आए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के प्रतिनिधियों और जैविक खेती करने वाले किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने जैविक उत्पादों की बाजार पहुंच, प्रमाणन में आने वाली चुनौतियों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की।
इस अवसर पर कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. बीरेंद्र प्रसाद यादव, कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव, अपर सचिव कल्पना कुमारी सहित विभाग के वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।