पूर्वांचल विश्वविद्यालय आने के लिए शिक्षकों को प्राचार्य से लेनी होगी अनुमति |

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कुलपति के आदेश पर कुलसचिव ने संबद्ध महाविद्यालयों को जारी किया पत्र, शिक्षण कार्य बाधित नहीं करने के निर्देश

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों के विश्वविद्यालय आने को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब महाविद्यालय के कार्य समय के दौरान विश्वविद्यालय आने के लिए शिक्षकों को संबंधित प्राचार्य को पूर्व सूचना देकर आवश्यक अनुमति लेनी होगी। कुलपति के आदेश पर कुलसचिव ने सभी संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इस संबंध में पत्र जारी किया है।

कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह की ओर से 6 नवंबर को जारी पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के संज्ञान में आया है कि संबद्ध महाविद्यालयों के कुछ शिक्षक महाविद्यालय के कार्य समय के दौरान विश्वविद्यालय आते हैं। इससे उनकी निर्धारित कक्षाएं और अन्य शैक्षणिक दायित्व प्रभावित होते हैं।

पत्र में विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कक्षाओं का नियमित संचालन और पाठ्यक्रम को निर्धारित समय पर पूरा करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्राचार्यों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने महाविद्यालय के शिक्षकों को विश्वविद्यालय आने की योजना इस तरह बनाने के लिए निर्देशित करें, जिससे अध्यापन कार्य प्रभावित न हो।

निर्देशों के अनुसार, यदि महाविद्यालय के कार्य समय में विश्वविद्यालय आना आवश्यक हो तो संबंधित शिक्षक प्राचार्य को पहले सूचना देकर अनुमति प्राप्त करें। इसके साथ ही अपनी निर्धारित कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करें।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी कहा है कि शिक्षक के विश्वविद्यालय आने से पहले संबंधित विद्यार्थियों को इसकी सूचना दी जाए, ताकि उनकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके। कुलसचिव ने सभी प्राचार्यों और शिक्षकों से इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

शिक्षक संगठनों ने जताया विरोध

विश्वविद्यालय के इस निर्देश पर शिक्षक नेताओं ने आपत्ति जताई है। शिक्षक नेता डॉ. यदुवंश कुमार ने कहा कि शिक्षक कक्षाएं पूरी करने के बाद ही छात्र, शिक्षक और कॉलेज हित से जुड़े जरूरी कार्यों के लिए विश्वविद्यालय जाते हैं। परीक्षा परिणाम से संबंधित काम या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए भी वे अध्यापन कार्य पूरा करने के बाद ही विश्वविद्यालय पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों पर किसी तरह की टिप्पणी करने से पहले उनकी कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने इस आदेश का विरोध करने की बात कही।

वहीं, पूर्वांचल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. राहुल सिंह ने आदेश को दुर्भावनापूर्ण और शिक्षकों की मर्यादा के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि करीब तीन लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई में लगे शिक्षक पूरी निष्ठा से कक्षाओं का संचालन करते हैं। उनके अनुसार, शिक्षक विद्यार्थियों या शिक्षकों से जुड़ी समस्या अथवा किसी अन्य जरूरी काम के लिए ही विश्वविद्यालय जाते हैं और प्राचार्य से अनुमति लेकर ही जाते हैं।

प्रो. राहुल सिंह ने इस आदेश का विरोध करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में कई कमियां हैं, जिनमें सुधार पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने परिणाम से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया और कहा कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के परिणाम प्रभावित हैं, जिनका निराकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों पर किसी तरह का भेदभावपूर्ण आरोप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का उद्देश्य शिक्षण कार्य की निरंतरता बनाए रखना बताया गया है, जबकि शिक्षक नेताओं ने इसे लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। अब इस आदेश को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षक संगठनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

संवाददाता: शम्भू विश्वकर्मा

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