आगरा, 14 दिसंबर 2025 – क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे पूर्वज बिना जिम या सप्लीमेंट्स के भी 80-90 साल तक स्वस्थ जीवन कैसे जी पाते थे? डॉ. मीना अग्रवाल, प्रसिद्ध नेचुरोपैथ और स्वास्थ्य विशेषज्ञ, बताती हैं कि इसका रहस्य केवल एक छोटी-सी आदत में छिपा है – रोज़ाना साइक्लिंग।
नेचुरोपैथी के सिद्धांतों के अनुसार, शारीरिक गतिविधि (विहार) को भोजन के बराबर महत्व दिया गया है। साइक्लिंग एक ऐसा लो-इम्पैक्ट, हृदय-अनुकूल व्यायाम है जो न केवल शरीर के 80% अंगों को सक्रिय करता है, बल्कि वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करने में भी सहायक है।
आधुनिक विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है कि नियमित साइक्लिंग से:
रक्त प्रवाह 25-30% बढ़ता है
फेफड़ों की क्षमता दोगुनी हो जाती है
टॉक्सिन्स पसीने के माध्यम से बाहर निकलते हैं
इंसुलिन स्तर संतुलित रहता है, जिससे डायबिटीज़ और फैटी लिवर जैसी बीमारियाँ नियंत्रित रहती हैं
हृदयाघात का खतरा 40-45% तक कम हो जाता है (WHO के अनुसार)
सर्दियों में साइक्लिंग के फायदे और भी बढ़ जाते हैं – शरीर अधिक कैलोरी जलाता है, Vitamin D का अवशोषण बढ़ता है, और सर्दी-खांसी का खतरा घटता है।
डॉ. अग्रवाल सुझाव देती हैं कि सुबह 5:30 से 8 बजे के बीच 20-30 मिनट की साइक्लिंग आदर्श है। भारी भोजन के तुरंत बाद साइक्लिंग न करें और हमेशा पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स साथ रखें।
उनका संदेश स्पष्ट है: “शरीर चलता है, तो रोग रुकता है!”
नेचुरोपैथी के माध्यम से स्वास्थ्य को प्राकृतिक रूप से संतुलित करना ही सच्ची स्वस्थ जीवनशैली है।
डॉ. मीना अग्रवाल
प्रमुख नेचुरोपैथ, आगरा
“Health is Wealth – प्रकृति के साथ जिएं, प्रकृति से जीएं!”