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Sciatica – साइटिका, बैक पैन, स्लिप डिस्क का इलाज -मीना अग्रवाल नेचुरोपैथी |

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साइटिका को गृध्रसी रोग कहा जाता है। इस रोग में पैर में तेज पीड़ा होती है, जिसके कारण व्यक्ति का चलने का तरीका गिद्ध (Vulture) जैसा हो जाता है। इसी वजह से इस रोग को गृध्रसी कहा गया है।

इसे वातजन्य रोगों की श्रेणी में रखा गया है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़े हुए वात दोष और दूषित कफ दोष के कारण उत्पन्न होती है।

जब व्यक्ति अत्यधिक वात बढ़ाने वाले आहार का सेवन करता है, जैसे—बीन्स, अंकुरित अनाज, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, अत्यधिक सूखा और ठंडा भोजन,

या फिर कड़वे और कसैले रस वाले पदार्थों का अधिक मात्रा में उपयोग करता है, लगातार उपवास करता है, बहुत देर तक खड़ा रहता है या लंबे समय तक एक ही जगह बैठा रहता है,

तो शरीर में वात दोष बढ़ जाता है। इसी बढ़े हुए वात दोष के कारण गृध्रसी और अन्य वात संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं।

अगर हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझें, तो हमारी रीढ़ की हड्डी कई छोटे-छोटे मनकों (Vertebrae) से बनी होती है। कमर के हिस्से में L4, L5, S1, S2, S3 जैसे मनके होते हैं।

इन मनकों के बीच से बहुत पतली नसें निकलती हैं, जो आगे जाकर आपस में मिल जाती हैं और मिलकर साइटिका नर्व बनाती हैं। यही नस हमारे हिप्स से शुरू होकर पूरी टांग में नीचे तक जाती है।

साइटिका एक प्रमुख नस है, जो कूल्हे से निकलकर पूरी टांग में फैलती है।
जहां-जहां यह नस जाती है, वहां-वहां व्यक्ति को दर्द महसूस होता है।

अब सवाल उठता है कि दर्द क्यों होता है?

रीढ़ की हड्डी के मनकों के बीच एक नरम डिस्क होती है, जो झटकों (Jerks) से बचाने का काम करती है।

किसी भी कारण से जब यह डिस्क अपनी जगह से हिल जाती है, तो समस्या शुरू हो जाती है।

अक्सर लोग मानते हैं कि भारी वजन उठाने या गिरने की वजह से डिस्क खिसक गई।
ऐसी स्थिति में डिस्क साइटिका नर्व पर दबाव डाल देती है, जिससे पूरी टांग में लगातार दर्द बना रहता है।

कभी-कभी डिस्क दब जाती है, जिससे मनकों के बीच का गैप कम हो जाता है।
कई बार डिस्क अपनी सीध से बाहर निकल जाती है।
और कई बार मनकों के बीच का अंतर ज्यादा बढ़ जाता है।

इन सभी परिस्थितियों में साइटिका नर्व पर दबाव पड़ता है और दर्द उत्पन्न होता है।

अब सवाल यह है कि डिस्क अपनी जगह से खिसकती क्यों है?
जिन लोगों के शरीर में वात यानी वायु अधिक बनती है,
जिनकी नसें और मांसपेशियां कमजोर होती हैं,
उन्हें साइटिका और कमर दर्द की समस्या ज्यादा होती है।

सबसे बड़े दो कारण यही हैं—
शरीर में वात की अधिकता और नसों की कमजोरी।

जब शरीर में वात बढ़ता है, तो यह नसों को कमजोर कर देता है और उनमें ऐंठन पैदा करता है।
इसीलिए सबसे जरूरी है शरीर से अतिरिक्त वात को बाहर निकालना।

आजकल साइटिका की समस्या इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि अधिकतर लोगों को दिनभर बैठकर काम करना पड़ता है।
इससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और साइटिका जैसी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है।

साइटिका दर्द होने के मुख्य कारण

  • जो लोग बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं
  • जो लोग भारी वजन उठाते हैं
  • जो लोग बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करते
  • जिनके शरीर में वात जमा होता रहता है

जब शरीर में बहुत अधिक वात इकट्ठा हो जाती है, तो यह डिस्क के अंदर मौजूद छल्लों के बीच के फ्लूड को सुखा देती है।
यह फ्लूड लगभग 80% पानी और 20% प्रोटीन व कैल्शियम से बना होता है।

फ्लूड सूखने के कारण छल्ले आपस में टकराने लगते हैं।
उनके बीच की जगह खत्म हो जाती है और किसी न किसी नस पर दबाव पड़ जाता है।

जब नस दबती है, तो पूरी टांग में दर्द शुरू हो जाता है।
यह दर्द मुख्य रूप से टांग के पीछे वाले हिस्से में होता है।
बैठने पर टांगों में सुन्नपन आने लगता है।
लेटने पर दर्द ज्यादा महसूस होता है।

जब व्यक्ति खड़ा होकर चलता है, तो शरीर गर्म होने लगता है और धीरे-धीरे साइटिका का दर्द कम होने लगता है।

साइटिका को ठीक करने के उपाय
अगर आप डॉक्टरी इलाज की बात करें, तो ज्यादातर मामलों में इसका स्थायी समाधान नहीं होता।
कारण यह है कि डॉक्टर एक डिस्क को तो ठीक कर सकते हैं,
लेकिन समस्या दोबारा किसी दूसरी डिस्क में हो सकती है।

इसीलिए कुछ ऐसे आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय जानते हैं,
जिनसे बहुत से लोगों को स्थायी लाभ मिला है।

डॉक्टरी पद्धति में जहां स्थायी इलाज नहीं है,
वहीं योग और आयुर्वेद में इसका परमानेंट समाधान संभव है।

  1. लहसुन वाला दूध
    लहसुन दूध स्वाद में भले अच्छा न लगे, लेकिन साइटिका के लिए बहुत असरदार है।
    कम से कम 20 दिन तक इसका सेवन करना जरूरी है।

विधि:
4–5 लहसुन की कलियां
लगभग 300 ml दूध
1 कप पानी
स्वादानुसार शहद

लहसुन छीलकर कुचल लें।
दूध और पानी के साथ उबालें।
उबाल आने पर गैस बंद करें और गुनगुना होने दें।
हल्का ठंडा होने पर शहद मिलाएं (डायबिटीज में न डालें)।

रोज रात सोने से 1 घंटा पहले पिएं।

लहसुन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं,
जो साइटिका नर्व की सूजन को कम करते हैं।

  1. हल्दी और तिल के तेल की मालिश
    1 चम्मच हल्दी पाउडर
    1 चम्मच तिल का तेल

दोनों को मिलाकर पेस्ट बनाएं और दर्द वाली जगह पर हल्के हाथ से मालिश करें।
दिन में दो बार किया जा सकता है।

ध्यान रखें—बाजार का पाउडर नहीं,
गांठ वाली हल्दी को सुखाकर पीसकर इस्तेमाल करें।

हल्दी नसों की मरम्मत (Nerve Regeneration) में मदद करती है।

  1. हल्दी पानी
    सुबह खाली पेट, बिना ब्रश किए:
    एक गिलास गुनगुने पानी में
    ½ चम्मच घर की पिसी हल्दी मिलाकर
    धीरे-धीरे सिप करके पिएं।
  2. शिलाजीत का सेवन
    शिलाजीत हड्डियों और नसों को मजबूत करता है।

लिक्विड शिलाजीत लें।
माचिस की तीली को 4 हिस्सों में तोड़ें।
शिलाजीत की एक हिस्से जितनी मात्रा दूध में मिलाकर पिएं।

15 दिन तक रोज सेवन करें।

  1. मेथी के लड्डू (वात संतुलन के लिए)
    मेथी वात को संतुलित करने की श्रेष्ठ औषधि है।
    सर्दियों में कमर दर्द और साइटिका बढ़ जाती है,
    इसलिए मेथी के लड्डू बहुत फायदेमंद हैं।

मेथी के लड्डू बनाने की विधि (Procedure)
आवश्यक सामग्री
600 ग्राम मेथी दाना
100 ग्राम बादाम
100 ग्राम काजू (चाहें तो छोड़ सकते हैं)
100 ग्राम सूखा नारियल (गोला)
300 ग्राम गेहूं का आटा
500 ग्राम गुड़ – अगर डायबिटीज है तो केवल 200 ग्राम
300 ग्राम शुद्ध देसी घी
500 ग्राम दूध
60 ग्राम कच्ची (खड़ी) हल्दी
2 जायफल
2 चम्मच सोंठ पाउडर
2 चम्मच जीरा
2 इंच दालचीनी
10 काली मिर्च
10 छोटी इलायची

बनाने की विधि
मेथी दाने की तैयारी
मेथी दानों को दरदरा पीस लें।
पीसी हुई मेथी को दूध में डालकर कम से कम 2 घंटे के लिए भिगो दें, ताकि कड़वाहट कम हो जाए।

हल्दी की तैयारी
कच्ची हल्दी के छोटे-छोटे टुकड़े करें।
इन्हें भी मेथी वाले दूध में भिगो दें।

गुड़ की चाशनी

एक बर्तन में गुड़ और 1 गिलास पानी डालकर गरम करें।
जब गुड़ पूरी तरह पिघल जाए, तो इसे छान लें ताकि गंदगी निकल जाए।

घी में भूनने की प्रक्रिया
कड़ाही गरम करें और घी डालें।
सबसे पहले गोंद (अगर डाल रहे हों) तल लें।
फिर ड्रायफ्रूट्स को हल्का सा भून लें।
बचे हुए घी में गेहूं का आटा सुनहरा होने तक भूनें।

मसालों की तैयारी

भीगी हुई मेथी और हल्दी को दूध सहित पीस लें।
पीसते समय इसमें सोंठ पाउडर भी मिला लें।
अलग से काली मिर्च, जीरा, इलायची, दालचीनी और जायफल पीस लें।
ड्रायफ्रूट्स और तले हुए गोंद को दरदरा पीस लें।

अंतिम मिश्रण तैयार करना

कड़ाही में थोड़ा घी डालें।
उसमें मेथी-हल्दी का पेस्ट डालकर धीमी आंच पर भूनें।
जब पेस्ट से घी अलग होने लगे, तब गैस बंद कर दें।

लड्डू बनाना

अब सभी भुनी और पिसी हुई सामग्री एक बड़े बर्तन में मिलाएं।
थोड़ा-थोड़ा करके गुड़ की चाशनी डालें और मिलाते जाएं।
मिश्रण गीला न हो, बस लड्डू बनने लायक हो।
हाथों से लड्डू बना लें।

2 घंटे खुली हवा में रखें।

फिर एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करें।

सेवन विधि
सुबह खाली पेट 1–2 लड्डू
ऊपर से 1 गिलास गुनगुना दूध
1 से 1.5 घंटे तक कुछ न खाएं

खट्टी चीजों से परहेज करें

ये लड्डू सिर्फ मिठाई नहीं,
एक आयुर्वेदिक औषधि हैं।

उड़द दाल के लड्डू
उड़द की दाल नसों और मांसपेशियों को मजबूत करती है।
सूखा नारियल हड्डियों और जोड़ों के लिए बेहद लाभकारी है।

उड़द दाल के लड्डू बनाने की विधि (Procedure)
आवश्यक सामग्री
1 कटोरी उड़द दाल (छिलके वाली)
1 सूखा नारियल
7–8 छोटी हरी इलायची
1 कप शुद्ध देसी घी
1 कप गन्ने की चीनी

बनाने की विधि
उड़द दाल की तैयारी

उड़द दाल को 3–4 घंटे पानी में भिगो दें।
हाथों से मसलकर उसका छिलका अलग कर दें।
अब दाल का महीन पेस्ट बना लें।

पकाने की प्रक्रिया

कड़ाही में घी डालें।
उसमें उड़द दाल का पेस्ट डालें।
धीमी आंच पर 15–20 मिनट तक पकाएं।
जब दाल अच्छी तरह पक जाए, तो इसमें कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल डालें।

मसाला और मिठास

इलायची पाउडर मिलाएं।
मिश्रण को गुनगुना होने दें।
अब इसमें गन्ने की चीनी मिलाएं।

लड्डू बनाना

हाथों से लड्डू बना लें।
एयरटाइट डिब्बे में रखें।

सेवन विधि

दिन में 2 लड्डू
खाली पेट खाएं
खाने के तुरंत बाद पानी न पिएं

तिल–गुड़ के लड्डू (सर्दियों में वात संतुलन के लिए)
तिल और गुड़ को मिलाकर बनाए जाने वाले लड्डू सर्दियों के मौसम में विशेष रूप से बहुत लाभकारी होते हैं।
आप इसे घर पर स्वयं बनाइए और पूरे सर्दी के मौसम में नियमित रूप से इसका सेवन कीजिए।

रेसिपी 1: साधारण तिल–गुड़ के लड्डू (बेसिक विधि)
सामग्री
1 कप सफेद या काले तिल
¾ कप गुड़ (कद्दूकस किया हुआ)
1–2 चम्मच देसी घी

बनाने की विधि
कढ़ाही को धीमी आंच पर गरम करें।
उसमें तिल डालकर लगातार चलाते हुए भूनें।
तिल चटकने लगें और हल्की खुशबू आने लगे, तब गैस बंद कर दें।
अब भुने हुए तिल को हल्का ठंडा करके दरदरा पीस लें।
उसी कढ़ाही में 1–2 चम्मच देसी घी डालें।
इसमें कद्दूकस किया हुआ गुड़ डालकर धीमी आंच पर पिघलाएं।
गुड़ को ज्यादा पकाना नहीं है, बस नरम होना चाहिए।
अब इसमें पिसे हुए तिल डालें और अच्छे से मिला लें।
गैस बंद कर दें।
मिश्रण हल्का गुनगुना रहे तभी हाथों से लड्डू बना लें।

सेवन
रोज 1–2 लड्डू
सर्दियों में सुबह या शाम लेना ज्यादा फायदेमंद

रेसिपी 2: पौष्टिक तिल–गुड़ के लड्डू (हड्डियों और साइटिका के लिए)
सामग्री
1 कप तिल
¾ कप गुड़
2 चम्मच देसी घी
2 चम्मच मूंगफली (भुनी और दरदरी पिसी हुई)
1 चम्मच सूखा नारियल (कद्दूकस किया हुआ)
½ चम्मच सोंठ पाउडर (वैकल्पिक, ठंड में बहुत लाभकारी)

बनाने की विधि
तिल को धीमी आंच पर भून लें और दरदरा पीस लें।
मूंगफली को भी भूनकर दरदरा पीस लें।
कढ़ाही में देसी घी डालें।
इसमें गुड़ डालकर हल्का पिघलाएं।
अब तिल, मूंगफली, सूखा नारियल और सोंठ पाउडर डालें।
सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें।
मिश्रण गुनगुना होने पर लड्डू बना लें।

तिल और गुड़ के लड्डू खाने से शरीर में कैल्शियम की कमी दूर होती है और साथ ही मैग्नीशियम की कमी भी पूरी होती है।
इसके अलावा सर्दियों के मौसम में जब हम सही चीजें खाते हैं, तो शरीर में अंदर से गर्माहट बनी रहती है।

तिल की सबसे खास बात यह है कि इसकी तासीर गर्म होती है।
यह शरीर में बढ़े हुए वात दोष को संतुलित करने का काम करता है।

वात दोष के बढ़ने की वजह से ही

जोड़ों में दर्द
घुटनों का दर्द
गठिया (Arthritis)
साइटिका
और कमर दर्द

जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
इसीलिए इन सभी रोगों में वात को संतुलित करना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।

ध्यान रखने योग्य बातें
डायबिटीज में गुड़ की मात्रा कम रखें
गर्म तासीर के कारण ज्यादा मात्रा न लें
1–2 लड्डू रोज पर्याप्त हैं

वात संतुलन के लिए मेथी दाने का सेवन
वात को संतुलित करने के लिए एक और बेहद असरदार औषधि है,
जिसका उपयोग लोग कई वर्षों से करते आ रहे हैं और इससे उन्हें अच्छे परिणाम भी मिले हैं।

इसके लिए आपको रोजाना 200 मेथी के दाने लेने हैं।
इन मेथी दानों का सेवन आपको लगातार कम से कम 3 महीने तक जरूर करना चाहिए।

मेथी दाने वात दोष को संतुलित करने में मदद करते हैं,
नसों को मजबूती देते हैं
और कमर दर्द, साइटिका व जोड़ों के दर्द में धीरे-धीरे आराम पहुंचाते हैं।

मसाला काढ़ा (पुराने कमर दर्द के लिए)
1 बड़ी इलायची
1 pinch दालचीनी
3 लौंग
गुड़

इनसे बना काढ़ा वात और कफ दोष को संतुलित करता है,
हड्डियों को मजबूत करता है और नसों को खोलता है।

खाली पेट सेवन करें।

मसाज और जीवनशैली
लहसुन और ऑलिव ऑयल से बना तेल

साइटिका और नर्व पेन के लिए मसाज ऑयल बनाने की विधि

आवश्यक सामग्री
400 ग्राम लहसुन की कलियां
1 लीटर जैतून का तेल (Olive Oil)

बनाने की विधि
लहसुन की सभी कलियों को अच्छी तरह छील लें।
अब इन्हें हल्का-सा क्रश कर लें (पूरी तरह पीसना नहीं है)।
इन क्रश की हुई कलियों को कांच की बोतल में डालें।
ऊपर से पूरा जैतून का तेल डाल दें।
बोतल को अच्छी तरह बंद कर दें।
इसे 15 दिनों के लिए किसी अंधेरी जगह पर रख दें।
ध्यान रखें, इस पर धूप बिल्कुल न पड़े।
बीच-बीच में बोतल को हिलाते रहें।
15 दिन बाद तेल को छान लें।

उपयोग का तरीका

इस तेल से कमर, कूल्हे और पैर में हल्की मालिश करें
रोज रात सोने से पहले लगाएं
साइटिका, नर्व पेन और कमर दर्द में बहुत लाभ मिलता है
रोज व्यायाम करें
सही पॉस्चर में बैठें
धूम्रपान न करें
एक जगह देर तक न बैठें या खड़े न रहें
शरीर में पानी की कमी न होने दें

परहेज
दही
फूलगोभी
भिंडी
उड़द दाल
ठंडी, तली-भुनी और मसालेदार चीजें
खट्टी चीजें

इनसे दूर रहें,
क्योंकि ये वात को बढ़ाती हैं और नसों को कमजोर करती हैं।

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