महाराष्ट्र प्रदेश पदाधिकारियों को संगठन की मज़बूती, आपसी इत्तेहाद और ज़मीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने का संदेश
मुंबई | रिपोर्ट: सैय्यद जाहिद अली रियासत
ऑल इंडिया क़ौमी तंजीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद तारिक अनवर ने वीडियो कॉल के ज़रिये संगठन के महाराष्ट्र प्रदेश पदाधिकारियों का मार्गदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने संगठन की जड़ों को मज़बूत करने, आपसी इत्तेहाद बनाए रखने और पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
उन्होंने संगठन को ज़मीनी स्तर पर अधिक सक्रिय बनाने और आम लोगों की समस्याओं को समझकर उनके बीच अपनी भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया।
संगठन की मज़बूती ही असल ताक़त
सांसद तारिक अनवर ने अपने मार्गदर्शन में संगठनात्मक एकता और आपसी तालमेल के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया। संगठन की तरक़्क़ी के लिए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय तथा समाज के बीच सक्रिय भागीदारी को अहम बताया गया।
संगठन को मज़बूत बनाने के लिए हर कार्यकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण है। आम लोगों की समस्याओं को समझना, उनके साथ संवाद बनाए रखना और ज़मीनी स्तर पर सक्रिय रहना संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के प्रमुख पहलू हैं।
वीडियो कॉल के ज़रिये दिया गया यह संदेश महाराष्ट्र प्रदेश के पदाधिकारियों के लिए संगठन की एकता और सक्रियता पर ध्यान केंद्रित करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण रहा।
मुनाफ हकीम के नेतृत्व में संगठनात्मक गतिविधियां
ऑल इंडिया क़ौमी तंजीम के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष मुनाफ हकीम की ओर से आयोजित प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक के संदर्भ में राष्ट्रीय अध्यक्ष तारिक अनवर ने वीडियो कॉल के माध्यम से मार्गदर्शन किया।
इस दौरान संगठन की बुनियाद को मज़बूत करने, आपसी तालमेल बनाए रखने और प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
बैठक में शामिल पदाधिकारियों और सदस्यों के नाम
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस संगठनात्मक गतिविधि से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों में नसीम सिद्दीकी, निजामुद्दीन राईन, रशीद खान, तारिक फारुकी (लघु उद्योग महामंडल के पूर्व अध्यक्ष), डॉ. हाजी जाकिर शेख (क़ौमी तंजीम के जनरल सेक्रेटरी), आसिफ हकीम (जनरल सेक्रेटरी), रफीक (पत्रकार) और संपादक जफर सिद्दीकी सहित अन्य लोग शामिल थे।
ज़मीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने का संदेश
सांसद तारिक अनवर के मार्गदर्शन का मुख्य संदेश संगठन की जड़ों को मज़बूत करना, आपसी इत्तेहाद बनाए रखना और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना रहा।
संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए पदाधिकारियों के बीच समन्वय और आम लोगों से जुड़ाव पर ज़ोर दिया गया।




