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अनुसंधान संस्कृति के दम पर ही साकार होगा ‘विकसित भारत’ का सपना: प्रो. तपन कुमार शांडिल्य |

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पटना के टी.पी.एस. कॉलेज में ‘लाइफ साइंसेज’ के बदलते आयामों पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

पटना:

अनुसंधान और नवाचार (Research and Innovation) की संस्कृति ही विकसित भारत की असली आधारशिला है।” यह विचार टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने व्यक्त किए। अवसर था कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का। इस सेमिनार का मुख्य विषय “जीवन विज्ञान के उभरते आयाम: अणुओं से पारितंत्र तक” (Emerging Dimensions of Life Sciences: From Molecules to Ecosystem) रखा गया था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की बॉटनी विभागाध्यक्ष प्रो. मनोरमा कुमारी शामिल हुईं। वहीं, मुख्य वक्ता के तौर पर यूपीईएस (UPES), देहरादून के प्रो. ध्रुव कुमार और विशिष्ट वक्ता के रूप में आरएमआरआईएमएस (RMRIMS), पटना के वैज्ञानिक-डी डॉ. आशीष कुमार ने अपने शोधपरक विचार साझा किए।

नई शिक्षा नीति (NEP-2020) और शोध का महत्व

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. शांडिल्य ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत अब कॉलेजों की जिम्मेदारी सिर्फ क्लासरूम टीचिंग तक सीमित नहीं है। अब उच्च शिक्षण संस्थानों को समाजोपयोगी ज्ञान, नई खोजों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि टी.पी.एस. कॉलेज अपने छात्रों में रिसर्च कल्चर विकसित करने के लिए लगातार ऐसे वैश्विक स्तर के आयोजन करता रहेगा।

बॉटनी विभागाध्यक्ष और कार्यक्रम के संयोजक डॉ. विनय भूषण कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि लाइफ साइंसेज अब पारंपरिक थ्योरी से आगे निकल चुका है। आज का दौर जीनोमिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एनवायरनमेंट साइंस के आपसी तालमेल (अंतर्विषयी अनुसंधान) का है, जो भविष्य की वैज्ञानिक प्रगति का मुख्य आधार है।

कैंसर के सटीक इलाज और कालाजार की हर्बल दवाओं पर मंथन

तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. ध्रुव कुमार ने ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती दौर में सटीक निदान और लैब से लेकर मरीजों के इलाज तक की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कैंसर से जुड़े प्रमुख जीनों (जैसे BRCA-1, BRCA-2, HER-2) और ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर्स की भूमिका समझाते हुए कहा कि जीनोमिक्स की मदद से कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आ रहे हैं।

वहीं, विशिष्ट वक्ता डॉ. आशीष कुमार ने कालाजार के इलाज के लिए प्राकृतिक और औषधीय पौधों में पाए जाने वाले ‘बायो-एक्टिव मेटाबोलाइट्स’ की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि हर्बल और प्राकृतिक उत्पादों पर आधारित दवाएं भविष्य की चिकित्सा प्रणाली को एक नया सुरक्षित विकल्प दे सकती हैं।

जीनोमिक्स और एआई से खुलेगा प्रगति का रास्ता

मुख्य अतिथि प्रो. मनोरमा कुमारी और आईक्यूएसी (IQAC) समन्वयक प्रो. (डॉ.) रूपम ने युवा शोधार्थियों से अत्याधुनिक तकनीकों (जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जीनोमिक्स विश्लेषण) का उपयोग कर समाज के काम आने वाले रिसर्च करने की अपील की। कॉलेज के रिसर्च कोऑर्डिनेटर डॉ. रवि प्रभाकर और मीडिया प्रभारी डॉ. मुकुंद कुमार ने भी इस सेमिनार को युवा वैज्ञानिकों को नई दिशा देने वाला एक बेहतरीन अकादमिक मंच बताया।

अंकित, शिवम और मुस्कान को मिला सर्वश्रेष्ठ शोध पुरस्कार

इस संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों ने अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट दिए गए। बेहतरीन शोध-प्रस्तुति के लिए जंतु विज्ञान (Zoology) के शोध छात्र डॉ. अंकित तिवारी, शिवम पराशर और मुस्कान कुमारी को ‘सर्वश्रेष्ठ शोध-प्रस्तुति पुरस्कार’ (Best Research Presentation Award) से नवाजा गया।

इस गरिमामयी अवसर पर कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर, पूर्व शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

ब्यूरो चीफ: विनोद प्रसाद (तृप्ति प्रमाण)

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Rajesh