निर्माण स्थलों पर QR कोड वाला सूचना बोर्ड अनिवार्य करने की मांग |

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बंटी सुनील तिवारी ने मनपा आयुक्त को सौंपा पत्र, नागरिकों को मिल सकेगी निर्माण अनुमति की आधिकारिक जानकारी

वसई-विरार, 16 सितंबर 2026। वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण से जुड़ी शिकायतों और नागरिकों को होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान को देखते हुए नगरसेविका बंटी सुनील तिवारी ने निर्माण स्थलों पर अधिकृत QR कोड वाला सूचना फलक अनिवार्य करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने महानगरपालिका आयुक्त को पत्र सौंपकर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई का अनुरोध किया है।

निर्माण की वैधता की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग

तिवारी ने अपने पत्र में कहा है कि महानगरपालिका क्षेत्र में कई स्थानों पर आवासीय और व्यावसायिक इमारतों के अनधिकृत निर्माण की शिकायतें सामने आती रहती हैं। उनका कहना है कि निर्माण की वैधता और मंजूरियों की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ नागरिक आर्थिक नुकसान का सामना कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बाद में संबंधित निर्माण के खिलाफ महानगरपालिका की कार्रवाई या तोड़फोड़ की स्थिति बनने पर वहां रहने वाले अथवा निवेश करने वाले नागरिकों को परेशानी हो सकती है।

QR कोड स्कैन करते ही मिले आधिकारिक जानकारी

नगरसेविका ने मांग की है कि प्रत्येक निर्माण स्थल पर महानगरपालिका की ओर से जारी अधिकृत QR कोड वाला सूचना बोर्ड लगाया जाए।

उनके प्रस्ताव के अनुसार, QR कोड स्कैन करने पर नागरिकों को संबंधित निर्माण की मंजूर बांधकाम परवानगी (CC), नगररचना विभाग से संबंधित मंजूरियां तथा अन्य आवश्यक आधिकारिक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होनी चाहिए।

इस व्यवस्था से नागरिक निर्माण की अनुमति और उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों की जानकारी सीधे डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे।

पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर

बंटी सुनील तिवारी ने मनपा आयुक्त से नागरिकों के हित में इस व्यवस्था को लागू करने और इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।

उनका कहना है कि यदि निर्माण स्थलों पर अधिकृत QR कोड के माध्यम से अनुमति संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, तो नागरिकों को निर्माण की वैधता जांचने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो सकती है। साथ ही निर्माण अनुमति से संबंधित जानकारी अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।

फिलहाल यह एक मांग और प्रस्ताव है। इस पर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, यह आगे स्पष्ट होगा।

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