विरार:
वसई-विरार शहर महानगरपालिका की ओर से आयोजित की जाने वाली 13वीं प्रतिष्ठित ‘मेयर मैराथन’ इस बार खेल से ज्यादा राजनीतिक खिंचतान को लेकर सुर्खियों में है। मैराथन के आयोजन के लिए प्रस्तावित ₹3.95 करोड़ के भारी-भरकम बजट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मोर्चा खोल दिया है। महानगरपालिका की हालिया महासभा में विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रशासन मैराथन के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई की बंदरबांट कर रहा है और आय-व्यय के आंकड़ों को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
स्पॉन्सरशिप और रजिस्ट्रेशन फीस पर उठे सवाल
महासभा के दौरान विपक्ष के नेता मनोज पाटिल ने मैराथन के कुल खर्च, विभिन्न प्रायोजकों (Sponsors) से प्राप्त कुल फंड और धावकों से ली जाने वाली एंट्री फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की पुरजोर मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने महासभा में केवल खर्च का अनुमानित आंकड़ा पेश किया, जबकि स्पॉन्सरशिप और रजिस्ट्रेशन के जरिए जमा होने वाले करोड़ों रुपये का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा सदन में नहीं रखा गया। पाटिल ने कहा कि प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर आधिकारिक प्रस्ताव में पूर्ण वित्तीय विवरण होना बेहद अनिवार्य है।
करोड़ों रुपये के राजस्व का क्या हुआ?
विपक्षी दलों के अनुसार, इस मैराथन प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 58,000 धावक हिस्सा लेते हैं। इनमें से करीब 40,000 प्रतिभागी औसतन ₹800 प्रति व्यक्ति पंजीकरण शुल्क जमा करते हैं। इतनी बड़ी धनराशि के साथ-साथ निजी स्पॉन्सर्स से मिलने वाले भारी-भरकम फंड का सही उपयोग कहां और कैसे हो रहा है, इसका कोई संतोषजनक जवाब नगर निगम प्रशासन नहीं दे पाया है।
लाखों के खर्च और बजट में उछाल पर जताई आपत्ति
भाजपा नेता मनोज पाटिल ने कहा कि इवेंट मैनेजमेंट, स्टेज डेकोरेशन, ब्रैंडिंग और फोटोग्राफी जैसे मदों में लाखों रुपये का अनाप-शनाप खर्च दिखाया जा रहा है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि कुछ साल पहले तक इस आयोजन का खर्च करीब ₹1 करोड़ था, जो पिछले वर्ष बढ़कर ₹2.5 करोड़ हुआ और इस साल सीधे ₹3.95 करोड़ तक पहुंचा दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा खेल आयोजनों के खिलाफ नहीं है, लेकिन सार्वजनिक धन की फिजूलखर्ची बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इस पूरे आर्थिक लेन-देन पर विस्तृत ‘श्वेतपत्र’ (White Paper) जारी करने की मांग की।
विरोध के बावजूद बहुमत से प्रस्ताव पारित
सदन में विपक्ष के तीखे विरोध और हंगामे के बावजूद सत्ताधारी दल ने अपने बहुमत के बल पर इस बजट प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। हालांकि, मैराथन के रूट, आयोजन स्थल और लगातार बढ़ते बजट को लेकर छिड़ा यह राजनीतिक संग्राम अब नगर निगम की राजनीति का सबसे गर्माया हुआ मुद्दा बन गया है।