---Advertisement---

वसई-विरार महापालिका में जनता और मीडिया की ‘नो एंट्री’ पर बवाल, भाजपा नेता ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम |

---Advertisement---

नालासोपारा: वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVCMC) मुख्यालय में आम नागरिकों और पत्रकारों के प्रवेश पर लगाए गए अचानक प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक पारा गरमा गया है। महापालिका मुख्यालय की तीसरी मंजिल—जहाँ आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त (उत्तर/दक्षिण) और स्थापना विभाग के मुख्य कार्यालय स्थित हैं—वहाँ आम जनता के जाने पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिला महामंत्री ब्रह्मदेव सिंह राजन ने मोर्चा खोलते हुए इसे पूरी तरह लोकतंत्र विरोधी करार दिया है।

“महापालिका जनता के पैसों से चलती है, किसी अधिकारी की जागीर नहीं”

भाजपा नेता ब्रह्मदेव सिंह राजन ने प्रशासनिक तानाशाही पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र 25 लाख से अधिक नागरिकों का प्रतिनिधित्व करता है। यह पूरा तंत्र जनता द्वारा दिए गए टैक्स के पैसों से संचालित होता है। ऐसे में नागरिकों को ही अपने हक के काम के लिए आयुक्त कार्यालय तक पहुँचने से रोकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

राजन ने प्रशासन से सीधे सवाल किया, “क्या कमिश्नर का दफ्तर कोई सार्वजनिक कार्यालय है या किसी की निजी संपत्ति? अगर बड़े अधिकारी ही जनता से दूरी बना लेंगे, तो लोग अपनी बुनियादी शिकायतें लेकर कहाँ भटकेंगे? और मीडिया जनता की आवाज को किसके सामने बुलंद करेगी?”

ज्ञापन सौंपकर उठाए कई तीखे सवाल, लिखित आदेश की मांग

महानगरपालिका आयुक्त को सौंपे गए एक आधिकारिक ज्ञापन में भाजपा नेता ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

  • यह प्रतिबंध किस कानून, शासकीय नियम या परिपत्र (Circular) के तहत लगाया गया है?
  • क्या इस प्रवेशबंदी के लिए आयुक्त की कोई लिखित अनुमति ली गई है?
  • यह फैसला राज्य सरकार का है या स्थानीय प्रशासन ने अपनी मर्जी से लिया है?
  • यदि कोई लिखित आदेश मौजूद नहीं है, तो नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार किसके मौखिक निर्देश पर छीने जा रहे हैं?
  • आखिर प्रशासन को जनता और मीडिया से ऐसा क्या डर है, जिसे वह छिपाना चाहता है?

राजन ने साफ कहा कि लोकतंत्र में जो प्रशासन जनता से संवाद बंद कर दे, वह कभी पारदर्शी नहीं हो सकता। इस संबंध में विपक्ष के नेता मनोज गोपाल पाटील को भी ज्ञापन की एक प्रति सौंपी गई है, ताकि इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ महापालिका की आगामी महासभा और अन्य सार्वजनिक मंचों पर आवाज उठाई जा सके।

15 दिनों का अल्टीमेटम: होगा ‘महापालिका प्रवेश अधिकार आंदोलन’

भाजपा युवा मोर्चा ने महानगरपालिका प्रशासन को इस तानाशाहीपूर्ण प्रतिबंध को हटाने और इसका कानूनी आधार स्पष्ट करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर यह प्रतिबंध वापस नहीं लिया गया, तो भाजपा आम जनता को साथ लेकर “महापालिका प्रवेश अधिकार आंदोलन” की शुरुआत करेगी। राजन ने स्पष्ट किया कि जनता की आवाज को दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से कड़ा विरोध किया जाएगा।

प्रशासन ने साधी चुप्पी:

इस संवेदनशील मामले पर महानगरपालिका का रुख जानने के लिए जब स्थापना विभाग की उपायुक्त (Deputy Commissioner) स्वाति देशपांडे से फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। प्रशासन की ओर से प्रतिक्रिया न मिलने के कारण इस फैसले के पीछे की वास्तविक वजह अभी तक साफ नहीं हो सकी है।

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---
Rajesh