मतदाताओं ने कहा- बिना उचित प्रक्रिया के नाम हटाना असंवैधानिक, दस्तावेज होने के बावजूद नाम गायब होने का आरोप
मुंबई: चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर मुंबई में मुस्लिम मतदाताओं के बीच नाराजगी और चिंता सामने आ रही है। कुछ मतदाताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कई लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी नागरिक के पास पहचान और निवास से जुड़े आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं, तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए।
इस मुद्दे को लेकर दक्षिण मुंबई सहित विभिन्न इलाकों में लोगों से उनकी राय ली गई, जहां कई मुस्लिम मतदाताओं ने SIR प्रक्रिया पर अपनी आपत्तियां और चिंताएं व्यक्त कीं।
मतदाता सूची से नाम हटने पर नबी अख्तर कुरैशी ने जताई नाराजगी
दक्षिण मुंबई के मुहम्मद अली गोगरी मोहल्ला निवासी नबी अख्तर कुरैशी ने आरोप लगाया कि कई लोगों के नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं और संबंधित लोगों को इसकी जानकारी भी समय पर नहीं मिलती।
कुरैशी ने SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल द्वारा कथित तौर पर उठाए गए सवालों और प्रस्तुत किए गए सबूतों का भी उल्लेख किया।
डॉ. जीनत शौकत अली ने मतदान के अधिकार पर उठाया सवाल
विशडम फाउंडेशन की चेयरमैन और इस्लामिक स्कॉलर डॉ. जीनत शौकत अली ने कहा कि मतदान प्रत्येक पात्र नागरिक का अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नागरिकों के पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो पास और पासपोर्ट जैसे दस्तावेज मौजूद हैं, तो उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
उन्होंने मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
खातून शेख का दावा- दस्तावेज जमा करने के बाद भी नाम सूची से गायब
महिला आंदोलन की कार्यकर्ता खातून शेख ने दावा किया कि उनके परिवार के कुछ सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उनका कहना है कि उनका परिवार पीढ़ियों से मुंबई में रह रहा है और उनके पास आवश्यक दस्तावेज भी मौजूद हैं।
खातून शेख के अनुसार, संबंधित कार्यालय में दस्तावेज और सबूत जमा कराने के बावजूद मतदाता सूची में नाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ बड़े आंदोलन की जरूरत बताई।
SIR प्रक्रिया पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
खातून शेख ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है और विपक्ष समर्थक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने बिहार और अन्य राज्यों में सामने आए विवादों का भी उल्लेख किया। हालांकि, ये आरोप संबंधित पक्षों के दावों के रूप में सामने आए हैं।
पारदर्शी प्रक्रिया की मांग
SIR को लेकर सामने आ रही इन आपत्तियों के बीच मतदाताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने या बनाए रखने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और पात्र नागरिकों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
मुस्लिम मतदाताओं के बीच बढ़ती नाराजगी को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।



