डहाणू नगर परिषद में बड़ा फैसला, नगराध्यक्ष के वित्तीय अधिकारों पर रोक की चर्चा तेज |

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आर्थिक लेनदेन में नगराध्यक्ष के हस्ताक्षर की अनिवार्यता समाप्त किए जाने की जानकारी, राजनीतिक हलकों में हलचल

डहाणू: डहाणू नगर परिषद के वित्तीय कामकाज को लेकर शासन की ओर से एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। जानकारी के अनुसार, नगर परिषद के आर्थिक लेनदेन में नगराध्यक्ष के हस्ताक्षर की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इस संबंध में नगर विकास विभाग की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

फॉर्म क्रमांक 64 पर हस्ताक्षर का अधिकार भी खत्म?

इस निर्णय के बाद फॉर्म क्रमांक 64 पर हस्ताक्षर करने का नगराध्यक्ष का अधिकार भी समाप्त किए जाने की बात कही जा रही है। फैसले के बाद नगर परिषद के वित्तीय मामलों में नगराध्यक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ठेकेदारों के बिलों को लेकर पहले से था विवाद

नगराध्यक्ष द्वारा कुछ ठेकेदारों के बिलों पर कथित रूप से हस्ताक्षर नहीं किए जाने को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। आरोप लगाया गया था कि राजनीतिक दबाव के कारण कुछ बिलों को मंजूरी नहीं दी गई, जिसके चलते संबंधित ठेकेदारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज

नए घटनाक्रम के बीच डहाणू की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। विरोधियों का कहना है कि नगराध्यक्ष किसी एक राजनीतिक दल के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि पूरे शहर के प्रतिनिधि होते हैं। ऐसे में उन्हें सभी नागरिकों और शहर के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए।

भाजपा के प्रभाव को लेकर भी चर्चा

डहाणू नगर परिषद में कुल 27 नगरसेवकों में से 17 भाजपा के होने का दावा किया गया है। इसके अलावा विभिन्न समितियों पर भी भाजपा के नियंत्रण की बात कही जा रही है।

ऐसे में नगर विकास विभाग के नए निर्णय के बाद नगर परिषद में भाजपा के प्रभाव और भविष्य की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का नगर परिषद के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज पर आने वाले समय में क्या असर पड़ता है।

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