माझगांव में आवागमन मार्ग रोके जाने का आरोप, पुलिस में शिकायत |

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जे.पी.एम. जीजीभॉय ट्रस्ट पर उप-किरायेदारों और निवासियों को परेशान करने के आरोप; जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और भायखला पुलिस से की गई शिकायत

मुंबई: दक्षिण मुंबई के व्यस्त माझगांव इलाके में स्थित नेसबिट हॉल कंपाउंड में उप-किरायेदारों और निवासियों के आवागमन का रास्ता रोके जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों ने जे.पी.एम. जीजीभॉय ट्रस्ट पर रास्ता बंद करने और उन्हें परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस एवं प्रशासन से शिकायत की है।

कंपाउंड में छह निवासी और 13 व्यावसायिक गाले

निवासियों के अनुसार, संबंधित परिसर में छह निवासी और 13 व्यावसायिक गोदाम/गाले हैं। उनका कहना है कि यह जमीन सरकार की ओर से संबंधित ट्रस्ट को लीज पर दी गई है।

निवासियों ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट द्वारा सरकारी जमीन को भोगवटा वर्ग-2 से भोगवटा वर्ग-1 में परिवर्तित कर उसे बिल्डर को देने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

एक साल से किराया नहीं लेने का दावा

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उप-किरायेदारों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से पिछले करीब एक वर्ष से उनसे किराया नहीं लिया जा रहा है।

इसके अलावा, मुख्य गेट पर टिन के पत्रे लगाए जाने और उसे दिनभर बंद रखे जाने का भी आरोप है। निवासियों के मुताबिक, गेट पर दो वॉचमैन तैनात होने के बावजूद उनके द्वारा गेट खोलने के लिए कोई पहल नहीं की जाती।

मलबे के कारण आवागमन प्रभावित होने का आरोप

निवासियों का कहना है कि कंपाउंड के भीतर तीन से चार ट्रक मलबा लाकर डाल दिया गया है। इससे आने-जाने का रास्ता प्रभावित हुआ है और उप-किरायेदारों एवं स्थानीय निवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रात के समय पर्याप्त बिजली और रोशनी की व्यवस्था नहीं होने के कारण भी लोगों को अंधेरे में परिसर से गुजरना पड़ता है, ऐसा निवासियों का कहना है।

व्यावसायिक गाला धारकों को आर्थिक नुकसान का दावा

गेट बंद रहने के कारण पिछले करीब एक महीने से व्यावसायिक गाला धारकों के कारोबार पर भी असर पड़ने का दावा किया गया है। निवासियों के अनुसार, आवागमन में परेशानी के चलते उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

जिलाधिकारी और पुलिस से शिकायत

मामले को लेकर निवासियों की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय, मुंबई पुलिस आयुक्त और भायखला पुलिस थाने में लिखित शिकायतें दी गई हैं।

हालांकि, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अभी तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

स्थानीय निवासियों ने अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूरे मामले का व्यक्तिगत रूप से संज्ञान लेने की मांग की है। उनकी मांग है कि संबंधित विभागों को मामले की तत्काल जांच करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।

फिलहाल, लगाए गए आरोपों को लेकर संबंधित ट्रस्ट का पक्ष सामने नहीं आया है। मामले में प्रशासन और पुलिस की जांच के बाद ही स्थिति और आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

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