मतभेदों को नहीं, एक-दूसरे से जुड़ाव को दें महत्व: ज्योति तिवारी |

Share:

टीवी अभिनेत्री ने कहा—शांति के लिए जरूरी है धैर्य, संवेदनशीलता और सामने वाले के नजरिए को समझना

मुंबई | साहिल यादव: टीवी अभिनेत्री ज्योति तिवारी इन दिनों शो हुई गुम यादें में सुहासिनी के किरदार में नजर आ रही हैं। अभिनेत्री का मानना है कि शांति का अर्थ केवल विवादों से दूर रहना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर सुकून, स्वीकार करने की क्षमता, धैर्य और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता का विकास भी है।

ज्योति तिवारी के अनुसार, जब मन शांत होता है तो व्यक्ति हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने या खुद को सही साबित करने की कोशिश से बच सकता है। उनके मुताबिक, जीवन में ऐसी कई परिस्थितियां होती हैं जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं होता। ऐसे मामलों को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना सकारात्मक जीवन के लिए जरूरी है।

अलग राय होना स्वाभाविक, समझ जरूरी

आपसी रिश्तों में समझ और सहानुभूति को महत्वपूर्ण बताते हुए ज्योति तिवारी का कहना है कि हर व्यक्ति की राय एक जैसी होना जरूरी नहीं है। हालांकि, सामने वाले के नजरिए को समझने की कोशिश रिश्तों में संवाद को बेहतर बना सकती है।

उनके अनुसार, छोटी-सी सहानुभूति भी बातचीत के तरीके में बदलाव ला सकती है और कई छोटे मतभेदों को बड़े विवाद में बदलने से रोक सकती है।

छोटे व्यवहार से भी सकारात्मक बदलाव संभव

ज्योति तिवारी का मानना है कि शांतिपूर्ण माहौल बनाने के लिए हमेशा बड़े कदम उठाने की आवश्यकता नहीं होती। किसी के साथ दयालु व्यवहार करना, तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना, धैर्य रखना और सामने वाले की बात ध्यान से सुनना जैसे छोटे प्रयास भी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने वाले पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारों और पृष्ठभूमि के बावजूद इंसानों की कई मूल भावनाएं समान होती हैं। हर व्यक्ति प्रेम, सम्मान, सुरक्षा और खुशी चाहता है। ऐसे में मतभेदों को बार-बार सामने रखने के बजाय उन भावनाओं पर ध्यान देना चाहिए जो लोगों को आपस में जोड़ती हैं।

शांति की जिम्मेदारी सामूहिक

समाज में शांति कायम करने की जिम्मेदारी को ज्योति तिवारी ने सामूहिक बताया। उनके अनुसार, संस्थाओं और सरकारों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन आम नागरिक और समुदाय भी अपने रोजमर्रा के व्यवहार के माध्यम से सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

अभिनेत्री के मुताबिक, सकारात्मक बदलाव की शुरुआत घर से और अपने आसपास के लोगों के साथ व्यवहार से भी हो सकती है।

पुरानी कड़वाहट से आगे बढ़ने पर जोर

मेल-मिलाप और पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़ने के विषय पर ज्योति तिवारी का कहना है कि आगे बढ़ने का अर्थ किसी तकलीफ या बुरे अनुभव को भूल जाना नहीं है। व्यक्ति अपने दर्द को स्वीकार करते हुए उससे सीख सकता है, अपनी सीमाएं तय कर सकता है और फिर भी मन में शांति के साथ आगे बढ़ने का निर्णय ले सकता है।

रिपोर्ट: साहिल यादव
राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक ‘तृप्ति प्रमाण’

Share: