भीमा-कोरेगांव विजयस्तंभ जमीन विवाद में पुणे कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की मांग |

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BRSP के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट डॉ. सुरेश माने का महाराष्ट्र सरकार से आग्रह; विजयस्तंभ परिसर के विकास कार्यों को लेकर भी उठाए सवाल

मुंबई: भीमा-कोरेगांव स्थित ऐतिहासिक विजयस्तंभ और उससे जुड़ी जमीन के विवाद में पुणे दिवाणी न्यायालय के 11 सितंबर 2026 के फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। बहुजन रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी (BRSP) के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट डॉ. सुरेश माने ने महाराष्ट्र सरकार से इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने का आग्रह किया है।

पुणे की अदालत ने जयस्तंभ और पेरणे स्थित लगभग 9.25 एकड़ भूमि पर जमादार-मालवदकर परिवार के कब्जे को लेकर फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और उसकी ओर से कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना संबंधित पक्ष को जमीन से बेदखल करने या उसके कब्जे में हस्तक्षेप करने से रोका है।

2017 से चल रहा था भूमि विवाद

उपलब्ध न्यायालयीन रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद वर्ष 2017 में दायर नियमित दिवाणी वाद से जुड़ा है। मामले में विजयस्तंभ परिसर और उससे लगी भूमि के कब्जे को लेकर जमादार-मालवदकर परिवार और राज्य सरकार के बीच कानूनी विवाद चल रहा था।

हालिया सुनवाई के दौरान BARTI और विजयस्तंभ संरक्षण एवं संवर्धन समिति को जुलाई 2026 में मामले से बाहर कर दिया गया था, जिसके बाद मुख्य विवाद राज्य सरकार और संबंधित परिवार के बीच केंद्रित रहा।

फैसले के खिलाफ अपील की मांग

डॉ. सुरेश माने की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि राज्य सरकार को फैसले का कानूनी परीक्षण कर समय गंवाए बिना उच्च न्यायालय में आवश्यक अपील दाखिल करनी चाहिए।

उनका कहना है कि यदि सरकार इस फैसले को चुनौती देना चाहती है तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और समयसीमा के भीतर कदम उठाना आवश्यक होगा। उन्होंने सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।

विजयस्तंभ परिसर के विकास कार्यों का मुद्दा

डॉ. माने के अनुसार, सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत BARTI की ओर से विजयस्तंभ परिसर में अतिक्रमण हटाने, सौंदर्यीकरण और विकास से संबंधित कार्य किए गए थे। उनका दावा है कि अदालत के हालिया फैसले के बाद इन कार्यों को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है।

वहीं, हालिया रिपोर्टिंग में यह भी सामने आया है कि विजयस्तंभ परिसर के विकास और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कार्यों को कानून की प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ाने की मांग प्रशासन के समक्ष रखी गई है।

सरकार से स्पष्ट कानूनी कदम उठाने की मांग

डॉ. सुरेश माने ने कहा कि बहुजन रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी की ओर से राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि वह पुणे दिवाणी न्यायालय के फैसले का उच्च न्यायालय में कानूनी परीक्षण कराए और विजयस्तंभ परिसर से संबंधित विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करे।

फिलहाल, पुणे दिवाणी न्यायालय का फैसला लागू है और आगे की स्थिति राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कानूनी कदमों तथा उच्च न्यायालय में संभावित कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

रिपोर्ट: सैय्यद जाहिद अली रियासत

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