बॉम्बे आर्ट सोसायटी चुनाव को लेकर प्रो. विजय राऊत के गंभीर आरोप |

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मौजूदा पदाधिकारियों के कामकाज पर उठाए सवाल; ‘संकल्प पैनल’ ने पारदर्शिता और पुनरुद्धार का दिया आश्वासन

रिपोर्ट: सैय्यद जाहिद अली रियासत

मुंबई। ‘द बॉम्बे आर्ट सोसायटी’ के 3 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित चुनाव को लेकर संस्था के कामकाज पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। मुंबई मराठी पत्रकार संघ के लोकमान्य सभागृह में प्रो. विजय राऊत और डॉ. गजानन शेपाळ ने पत्रकार परिषद आयोजित कर मौजूदा पदाधिकारी मंडल के कामकाज से जुड़े कई सवाल उठाए। ‘द बॉम्बे आर्ट सोसायटी चुनाव 2026 : खंत व पर्याय’ विषय पर आयोजित पत्रकार परिषद में प्रो. विजय राऊत ने ‘संकल्प पैनल’ की भूमिका सामने रखी।

बॉम्बे आर्ट सोसायटी की स्थापना वर्ष 1888 में हुई थी और संस्था अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर खुद को कला के क्षेत्र में कार्यरत एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में प्रस्तुत करती है। संस्था का बांद्रा रीक्लेमेशन स्थित आर्ट कॉम्प्लेक्स तीन आर्ट गैलरी, एम्फीथिएटर, लाइब्रेरी और अन्य सुविधाओं से जुड़ा है।

मौजूदा पदाधिकारियों के कार्यकाल पर सवाल

प्रो. विजय राऊत के अनुसार, मौजूदा पदाधिकारी मंडल के कई सदस्य लंबे समय से संस्था के पदों पर बने हुए हैं। उन्होंने संस्था के पुनरुद्धार के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और कला क्षेत्र से जुड़े व्यापक कार्यक्रमों की जरूरत बताई।

राऊत ने दावा किया कि 3 अक्टूबर को चुनाव की घोषणा किए जाने के बावजूद कई आजीवन सदस्यों तक चुनाव संबंधी जानकारी देर से पहुंची अथवा पर्याप्त रूप से नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि संस्था के सदस्य मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों तथा महाराष्ट्र के बाहर भी हैं और सभी मतदाताओं तक चुनाव संबंधी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

दिवंगत चंद्रजित यादव के नाम को लेकर सवाल

पत्रकार परिषद में प्रो. राऊत ने दिवंगत वरिष्ठ मूर्तिकार और संस्था के पूर्व सचिव चंद्रजित यादव के संदर्भ में भी सवाल उठाए। राऊत के अनुसार, चंद्रजित यादव का 10 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी के बाद निधन हुआ था। इसके बावजूद संस्था से संबंधित एक ऑनलाइन लिंक पर कथित तौर पर उनका नाम ‘नोडल ऑफिसर’ के रूप में दिखाई दे रहा है।

राऊत ने इसे संस्था के प्रशासन से जुड़ी कथित लापरवाही का उदाहरण बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2015 से धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में आवश्यक ‘चेंज रिपोर्ट’ प्रस्तुत नहीं की गई है और इस आधार पर मौजूदा पदाधिकारी मंडल की वैधता को लेकर सवाल उठते हैं।

इन आरोपों के समर्थन में राऊत ने संबंधित दस्तावेज होने का दावा किया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है।

संस्था के पुराने कामकाज और विकास का किया उल्लेख

बॉम्बे आर्ट सोसायटी के पुराने कामकाज का उल्लेख करते हुए राऊत ने कहा कि वर्ष 2002 से पहले संस्था जहांगीर आर्ट गैलरी की एक छोटी जगह से संचालित होती थी। उनके अनुसार, 2002 में उनके नेतृत्व वाले पैनल को सफलता मिलने के बाद संस्था के विकास के लिए कई प्रयास किए गए।

उन्होंने म्हाडा से वापस लिए गए भूखंड को पुनः प्राप्त करने के प्रयासों से लेकर बांद्रा में आर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण तक विभिन्न कार्यों का उल्लेख किया। संस्था की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बांद्रा रीक्लेमेशन में 10,000 वर्ग फुट क्षेत्र में आर्ट कॉम्प्लेक्स विकसित किया गया और इसका उद्घाटन 13 फरवरी 2016 को हुआ था।

राऊत ने दावा किया कि उस अवधि में आजीवन सदस्यता बढ़ाने, विभिन्न पुरस्कार शुरू करने और वार्षिक कला प्रदर्शनी के विस्तार के लिए भी प्रयास किए गए थे। हालांकि, उनके अनुसार वर्ष 2010 के बाद संस्था के कामकाज में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।

कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल

राऊत ने आरोप लगाया कि वार्षिक कला प्रदर्शनी के अलावा संस्था की ओर से बड़े स्तर पर कला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का पर्याप्त आयोजन नहीं किया गया। उन्होंने सदस्यों की पूर्ण सूची, वार्षिक आमसभाओं में पारित प्रस्तावों के क्रियान्वयन और संस्था की संपत्ति से जुड़े बिल्डर के साथ हुए व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए।

बॉम्बे आर्ट सोसायटी की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 के लिए 134वें ऑल इंडिया एनुअल आर्ट एग्जिबिशन का आयोजन दर्ज है, जो 24 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक जहांगीर आर्ट गैलरी में आयोजित हुआ था।

आर्थिक व्यवहार और ऑडिट रिपोर्ट पर सवाल

पत्रकार परिषद में संस्था के आर्थिक व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रो. राऊत ने दावा किया कि वर्ष 2017-18 में धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में ऑनलाइन ऑडिट रिपोर्ट जमा किए जाने के बाद वर्ष 2026 तक के बाद के वर्षों की ऑनलाइन ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गईं।

राऊत ने पत्रकारों के सामने संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का दावा करते हुए मौजूदा समिति के आर्थिक व्यवहारों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 की ऑनलाइन ऑडिट रिपोर्ट पर तत्कालीन अध्यक्ष पद्मश्री वासुदेव कामत और कोषाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र जगताप के हस्ताक्षर हैं।

इसी संदर्भ में उन्होंने वासुदेव कामत के अध्यक्ष पद से इस्तीफे के कारणों को लेकर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या इसका संबंध संस्था के आर्थिक व्यवहार से था। हालांकि, पत्रकार परिषद के दौरान संबंधित व्यक्तियों की ओर से इन सवालों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।

‘संकल्प पैनल’ ने रखा अपना विजन

प्रो. विजय राऊत ने कहा कि ‘संकल्प पैनल’ का उद्देश्य ‘द बॉम्बे आर्ट सोसायटी’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण कला संस्था के रूप में विकसित करना और भारतीय कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उसकी प्रतिष्ठा को मजबूत करना है।

पैनल की ओर से पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्था की गतिविधियों के विस्तार पर जोर देने की बात कही गई। चुनाव को लेकर सभी आजीवन सदस्यों से मतदान में भाग लेने और संस्था के भविष्य को लेकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अपील भी की गई।

फिलहाल पत्रकार परिषद में उठाए गए चेंज रिपोर्ट, ऑडिट रिपोर्ट, आर्थिक व्यवहार, पदाधिकारियों की वैधता और संपत्ति से जुड़े सवाल प्रो. विजय राऊत एवं ‘संकल्प पैनल’ के दावे हैं। इन आरोपों पर मौजूदा पदाधिकारियों या संबंधित व्यक्तियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की स्थिति पर अधिक स्पष्टता आएगी।

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