बीएमसी और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अपील के बावजूद कई इलाकों में आतिशबाजी; पटाखों की खुलेआम बिक्री पर पर्यावरण प्रेमियों ने उठाए सवाल
मुंबई: बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए मुंबई में पटाखे नहीं जलाने की अपील का दिवाली के दौरान खास असर दिखाई नहीं दिया। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद शहर के कई इलाकों में सुबह तड़के से ही पटाखों की आतिशबाजी शुरू हो गई। सुबह से लेकर देर रात तक पटाखों की आवाज गूंजती रही, जिससे प्रशासन के प्रयासों और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पिछले कुछ वर्षों से मुंबई की वायु गुणवत्ता लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों का धुआं और औद्योगिक गतिविधियां प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण प्रदूषण की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर पड़ने की आशंका रहती है।
इसी खतरे को देखते हुए मुंबई हाईकोर्ट ने पटाखे जलाने को लेकर प्रतिबंधात्मक निर्देश जारी किए हैं। बीएमसी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने भी नागरिकों से पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने और न्यायालय के निर्देशों का पालन करने की अपील की थी।
इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में सड़कों पर पटाखों की बिक्री जारी रही। सुबह से लेकर देर रात तक आतिशबाजी होने से वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण की समस्या भी बढ़ी।
खुलेआम पटाखों की बिक्री पर उठे सवाल
पर्यावरण प्रेमियों ने सवाल उठाया है कि जब पटाखे जलाने को लेकर प्रतिबंधात्मक नियम लागू हैं, तो खुलेआम उनकी बिक्री कैसे हो रही है? उन्होंने पटाखों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण


