पटना, ठाकुर प्रसाद सिंह महाविद्यालय में 10 से 12 मार्च 2026 तक “अनाज प्रोफाइलिंग विथ हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को अनाजों में उपस्थित पोषक तत्वों, विशेषकर प्रोटीन, विटामिन आदि के विश्लेषण की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना तथा हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (HPLC) एवं यूवी-विस स्पेक्ट्रोफोटोमीटर पर व्यावहारिक (हैंड्स-ऑन) प्रशिक्षण प्रदान करना था। समापन सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि स्वस्थ मानव पूंजी किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला है। भारत जैसे देश में जहाँ कुपोषण अभी भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, वहाँ अनाज प्रोफाइलिंग के माध्यम से भोजन के पोषक तत्वों—विशेषकर प्रोटीन—की सटीक जानकारी प्राप्त कर अनाजों का उचित वर्गीकरण एवं गुणवत्ता सुधार संभव है। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रेरक पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए कहा— “सच है विपत्ति जब आती है, विघ्नों को गले लगाते हैं; मुख से न कभी ‘उफ्फ’ कहते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अनाज प्रोफाइलिंग के माध्यम से न केवल शरीर बल्कि समाज और राष्ट्र की चेतना को भी सुदृढ़ बनाया जा सकता है। उन्होंने दिनकर की ही पंक्तियों से प्रेरणा देते हुए कहा— “जब मानव जोर लगाता है, पत्थर भी फूल बन जाते हैं।” प्रो. श्यामल किशोर (प्राचार्य, रामेश्वर दास महाविद्यालय) ने अपने संबोधन में कहा कि अनाज प्रोफाइलिंग जैसे प्रासंगिक विषय पर कार्यशाला आयोजित करना अत्यंत सार्थक है। वेदों में अन्न को ‘प्राण’ कहा गया है, अर्थात अन्न ही जीवन का आधार है। इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पोषण एवं खाद्य गुणवत्ता के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए प्रेरित करते हैं। डॉ. शशि प्रभा दुबे (कार्यशाला समन्वयक) ने कहा कि इस प्रकार की प्रशिक्षण आधारित कार्यशालाएँ विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोग में दक्ष बनाती हैं तथा अनुसंधान की गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करती हैं। डॉ. रेखा कुमारी (स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष, प्राणिविज्ञान विभाग) ने कहा कि“आज के समय में पोषण और खाद्य गुणवत्ता का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। अनाज प्रोफाइलिंग के माध्यम से हम भोजन की गुणवत्ता का वैज्ञानिक आकलन कर सकते हैं और समाज में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ा सकते हैं। प्रो. रूपम ,आईक्यूएसी समन्वयक, टीपीएस कॉलेज ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ महाविद्यालय में अनुसंधान संस्कृति को मजबूत बनाती हैं और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ती हैं। डॉ. राकेश कुमार ( मुख्य प्रशिक्षक ने महाविद्यालय की प्रयोगशाला सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि टीपीएस कॉलेज की प्रयोगशाला में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों के कारण प्रतिभागियों को वास्तविक शोध वातावरण में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। इस अवसर पर प्रो. कृष्णानंदन प्रसाद (कॉलेज निरीक्षक, पटलिपुत्र विश्वविद्यालय) ने कहा कि टीपीएस कॉलेज द्वारा आयोजित यह कार्यशाला उच्च शिक्षा में कौशल आधारित प्रशिक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रतिभागियों की ओर से डॉ. नरेश कुमार (एस.जी.जी.एस. कॉलेज) ने कहा कि यह कार्यशाला मेरे लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक अनुभव रही और इससे आधुनिक विश्लेषण तकनीकों की बेहतर समझ प्राप्त हुई। कार्यक्रम में सत्यम सौरभ सिंह, दामिनी स्कंधवासिनी, आशीष पुष्कर सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी कार्यक्रम की उपयोगिता और व्यवस्था की सराहना की। कार्यक्रम में डॉ. उमेश कुमार, डॉ. मुकुंद कुमार, अंकित तिवारी, शिवम कुमार, विशाल कुमार, डॉ. अमरेंद्र धारी द्विवेदी, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. विनय भूषण कुमार सहित अनेक शिक्षक एवं शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का सफल संचालन शोध छात्र कृष्ण कुमार ने किया, जबकि डॉ. नरेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। यह कार्यशाला टीपीएस कॉलेज, पटना द्वारा विज्ञान शिक्षा में अनुसंधान-आधारित कौशल विकास तथा राष्ट्रीय स्तर की पोषण संबंधी चुनौतियों से निपटने की दिशा में उठाया गया एक सराहनीय कदम सिद्ध हुई।
अनाज प्रोफाइलिंग विथ हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग” विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला का भव्य समापन |
Published On: March 12, 2026 7:21 pm
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