संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष मदन सिंह का उद्घोष: “सेवा ही परम* संकल्प और राष्ट्र-हित ही सर्वोपरि* ध्येय”
मनोर, पालघर (महाराष्ट्र): किसी भी सामाजिक संगठन की सार्थकता उसकी घोषणाओं से नहीं, बल्कि उसके धरातल पर किए गए कार्यों से सिद्ध होती है। महाराष्ट्र के पालघर जिले के मनोर स्थित राष्ट्रीय मुख्यालय से संचालित ‘मानवा कल्याणकारी फाउंडेशन’ आगामी 10 अप्रैल को अपना प्रथम आधिकारिक स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। यह अवसर न केवल एक वर्ष की यात्रा का लेखा-जोखा है, बल्कि संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष मदन सिंह के उस विजन का उत्सव है, जहाँ सेवा को जीवन का मुख्य संकल्प माना गया है। 10 अप्रैल: वैधानिक चेतना और अटूट विश्वास का उदय संस्थापक मदन सिंह के नेतृत्व में 10 अप्रैल की तिथि संस्था के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बन चुकी है। पिछले वर्ष इसी दिन फाउंडेशन ने अपनी औपचारिक यात्रा का श्रीगणेश किया था। श्री सिंह का मानना है कि वास्तविक नेतृत्व वही है जो समाज के अंतिम व्यक्ति की समस्याओं को समझे और उन्हें दूर करने का साहस रखे। उनके मार्गदर्शन में फाउंडेशन ने अपने प्रथम वर्ष में ही शुचिता, सुशासन और पारदर्शिता के वे मानक स्थापित किए हैं, जो वर्तमान
सामाजिक परिदृश्य में प्रेरणादायी हैं। स्थापना दिवस समारोह: आध्यात्मिक ऊर्जा और मानवीय सरोकार राष्ट्रीय अध्यक्ष मदन सिंह के निर्देशन में स्थापना दिवस का कार्यक्रम ‘संस्कार और सरोकार’ के अद्भुत समन्वय के साथ आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है: * आध्यात्मिक शुभारंभ: कार्यक्रम का मंगलारंभ प्रातः 08:00 बजे राष्ट्रीय मुख्यालय में श्री सत्यनारायण भगवान की भव्य पूजा-अर्चना के साथ होगा। मदन सिंह का मानना है कि ईश्वरीय अधिष्ठान के बिना लोक-कल्याण का मार्ग पूर्ण नहीं होता। इस पूजन के माध्यम से संस्था की आगामी योजनाओं और राष्ट्र की सुख-समृद्धि हेतु सामूहिक प्रार्थना की जाएगी, जिसके उपरांत महाप्रसाद का वितरण होगा। * शिक्षा और स्वावलंबन का उपहार: पूजा के पश्चात, अध्यक्ष महोदय के कर-कमलों द्वारा जरूरतमंद बच्चों को शैक्षणिक सामग्री तथा स्थानीय नागरिकों को जीवन-उपयोगी वस्तुओं का वितरण किया जाएगा। यह कदम ‘शिक्षित और समर्थ भारत’ के संकल्प को जमीनी धरातल पर क्रियान्वित करने का एक सशक्त प्रयास है। समर्थ भारत की संकल्पना और कार्यप्रणाली मदन सिंह के नेतृत्व में फाउंडेशन की कार्यप्रणाली तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है: दूरदर्शी नेतृत्व: मनोर (पालघर) को राष्ट्रीय मुख्यालय के रूप में चुनना इस बात का परिचायक है कि संस्था का लक्ष्य विकास की मुख्यधारा को सीधे उन क्षेत्रों तक पहुँचाना है, जो भौगोलिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। * सामूहिक भागीदारी: अध्यक्ष महोदय ने समाज के हर वर्ग से ‘तन, मन और धन’ से सहयोग का आह्वान किया है। उनका मानना है कि जन-भागीदारी ही राष्ट्र-सेवा के महायज्ञ को सफल बनाती है। * अनुशासित कार्यशैली: फाउंडेशन के भीतर एक व्यवस्थित कार्य-संस्कृति विकसित की गई है, जहाँ हर सेवा कार्य परिणाम-उन्मुख (Result-Oriented) होता है। मानवता की नई पहचान मानवा कल्याणकारी फाउंडेशन का यह प्रथम स्थापना दिवस एक नई सामाजिक क्रांति का सूत्रपात है। “सेवा ही संकल्प” के मंत्र के साथ राष्ट्र सेवा में समर्पित यह संगठन आने वाले समय में सेवा और पारदर्शिता का एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है। ॥ आधिकारिक उद्घोष ॥ > “राष्ट्र सेवा ही हमारा परमो धर्म है। 10 अप्रैल को मनोर के राष्ट्रीय मुख्यालय से शुरू होने वाला यह सेवा-यज्ञ प्रत्येक नागरिक के सहयोग से एक महान वटवृक्ष बनेगा। हम केवल सहायता नहीं करते, हम एक समर्थ और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करते हैं।” > —
मदन सिंह (संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष)