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वसई-विरार में रेबीज टीके की किल्लत: आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक के बीच मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का चक्कर |

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वसई-विरार, तृप्ति प्रमाण ब्यूरो:
वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक दिन-प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। नगर निगम द्वारा इस समस्या से निपटने के लिए प्रभावी कदम न उठाए जाने के कारण आम नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सड़कों पर आवागमन करने वाले पैदल यात्रियों और गलियों में खेलने वाले बच्चों पर कुत्तों के हमले का खतरा लगातार बना हुआ है।
कुत्ते के काटने के बाद रेबीज से बचाव के लिए आवश्यक टीकाकरण की सुविधा महानगरपालिका संचालित अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है। पीड़ितों को टीका लगवाने के लिए अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जहाँ उन्हें स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि रेबीज वैक्सीन का स्टॉक समाप्त हो चुका है।
वसई, विरार और नालासोपारा सहित इस क्षेत्र की कुल आबादी २५ लाख से अधिक है। यहाँ की प्रमुख सड़कों और आवासीय गलियों में आवारा कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। पूर्व में महानगरपालिका द्वारा कुत्तों की नसबंदी अभियान चलाया जाता था, किंतु वर्तमान में यह प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है। इसके परिणामस्वरूप आवारा कुत्तों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।
सरकारी अस्पतालों में रेबीज वैक्सीन की अनुपलब्धता के कारण पीड़ित नागरिकों को निजी अस्पतालों में उपचार लेना पड़ रहा है, जहाँ उच्च मूल्य पर यह टीका लगाया जाता है। इस स्थिति को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के जिला पदाधिकारी मनोज बारोट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि महानगरपालिका और कुछ निजी स्वास्थ्य केंद्रों के बीच समझौते से रेबीज वैक्सीन की कृत्रिम किल्लत पैदा की जा रही हो सकती है, जिससे इसकी कालाबाजारी को बढ़ावा मिल रहा हो।
श्री बारोट ने महानगरपालिका आयुक्त से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नसबंदी अभियान को पुनः प्रारंभ करने और अस्पतालों में रेबीज वैक्सीन की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

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Rajesh