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मुरादाबाद: नए डीएम डॉ. राजेन्द्र पैंसिया का प्राइवेट स्कूलों पर बड़ा एक्शन, फीस और ड्रेस पर लगी लगाम |

मुरादाबाद। जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने जिले के प्राइवेट स्कूलों की नियामक व्यवस्था को लेकर बड़े कदम उठाए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में डीएम ने कक्षा एक से बारहवीं तक एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की किताबों को अनिवार्य करने सहित फीस संरचना, यूनिफॉर्म और अतिरिक्त सामग्री के मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
📌 बैठक के मुख्य निर्देश
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्राइवेट स्कूल द्वारा अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा। स्कूल प्रबंधन बिना उचित अनुमति के फीस में वृद्धि, वार्षिक रूप से यूनिफॉर्म परिवर्तन या नई पाठ्य सामग्री थोपने की स्थिति में नहीं रहेंगे।
इस संबंध में जिला स्तर पर एक विशेष समिति का गठन किया गया है। समिति अगले पंद्रह दिनों के भीतर सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों के रिकॉर्ड का सत्यापन करेगी। जांच के दायरे में फीस रजिस्टर, पाठ्यक्रम अनुपालन, यूनिफॉर्म नीति और अतिरिक्त शुल्क की वैधता शामिल होगी।
🔍 जांच प्रक्रिया और संभावित कार्रवाई
प्रशासन के अनुसार, यदि किसी संस्थान में नियमों का उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिक्षा विभाग के नियमावली के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसमें आर्थिक जुर्माना, मान्यता निलंबन या आवश्यकता पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का प्रावधान है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और दस्तावेज़-आधारित हो। साथ ही, अभिभावकों को भी शिकायत निवारण के लिए निर्धारित हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग करने की अपील की गई है।
📚 एनसीईआरटी किताबों के लागू होने के प्रभाव
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एनसीईआरटी पाठ्यक्रम का एकरूपीकरण छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार ला सकता है। यह कदम छात्रों को विभिन्न बोर्डों के बीच असमानता से बचाएगा और भविष्य में प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध हो सकता है।
हालाँकि, कुछ प्राइवेट स्कूल प्रबंधन इस निर्णय के कार्यान्वयन को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि पाठ्यक्रम परिवर्तन के लिए उचित समय और प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी।
👨‍👩‍👧 अभिभावकों के लिए राहत के संकेत
इस निर्णय से अभिभावक वर्ग में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई अभिभावकों ने कहा कि पिछले वर्षों में स्कूलों द्वारा बार-बार किताबें और यूनिफॉर्म बदलने से अतिरिक्त व्यय होता था। डीएम के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद है कि शिक्षा पर परिवारिक बजट नियंत्रित रहेगा।
प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे स्कूलों द्वारा जारी की गई फीस रसीदों और सूचनाओं का रिकॉर्ड रखें। यदि कोई संस्था नियमों का उल्लंघन करती है, तो वे संबंधित विभाग को लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
🗓️ आगे की कार्ययोजना
विशेष समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करने के बाद जिलाधिकारी को सौंपेगी। इसके आधार पर आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय या आधिकारिक जिला वेबसाइट से संपर्क कर सकते हैं।

Sharad Sharma

Senior Journalist & Chief Editor covering breaking national and international news stories.