चेन्नई/अंगुल: बारह साल… इतना लंबा समय कि एक परिवार अपने लापता सदस्य को हमेशा के लिए खो चुका होता है। लेकिन ओडिशा के अंगुल जिले के हानादिहा गांव में उम्मीद का एक ऐसा दीपक जला, जिसने साबित कर दिया कि निस्वार्थ सेवा और सही प्रयासों से चमत्कार संभव हैं। 29 वर्षीय प्रवत नायक, जो 17 साल की उम्र में मानसिक बीमारी के कारण लापता हो गए थे, 12 साल बाद अपने परिवार से जा मिले।
जब टूट चुकी थी परिवार की उम्मीदें
प्रवत के लापता होने के बाद परिवार ने आसमान सिर पर उठा लिया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। वक्त की मार ने प्रवत के माता-पिता को उनसे छीन लिया, और भाई-बहनों ने भी भारी मन से उन्हें मृत मान लिया। उन्हें क्या पता था कि उनका अपना चेन्नई की सड़कों पर भूखा-प्यासा और बिना आश्रय के भटक रहा है।
‘उदवुम करंगल’ और मेडिकल स्टोर ने सुलझाई पहेली
28 मई को चेन्नई की प्रसिद्ध सामाजिक संस्था ‘उदवुम करंगल’ के कार्यकर्ता श्री मोहन ने प्रवत को मदुरावोयल से रेस्क्यू किया। संस्था के ‘डिग्निटी होम’ में उन्हें चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता मिली। इलाज के बाद जब प्रवत को छोटे-छोटे सुराग याद आए, तो NGO की टीम ने इंटरनेट के जरिए उनके गांव ‘हानादिहा’ तक पहुँचने में सफलता पाई। टीम ने गांव के ‘मां संतोषी मेडिकल स्टोर’ से संपर्क किया, जिसके मालिक ने प्रवत को पहचान लिया और परिवार तक खबर पहुँचाई।
भावुक मिलन और ‘पापाजी’ का आशीर्वाद
संयोग से प्रवत का छोटा भाई पबन नायक चेन्नई में ही काम करता था। खबर मिलते ही वह NGO सेंटर पहुँचा। 12 साल बाद भाइयों का यह मिलन आंसुओं में डूबा हुआ था। विदाई के समय संस्था के संस्थापक सचिव ‘पापाजी’ (श्री विद्याकर) ने प्रवत को एक महीने की दवाइयां दीं और परिवार को उनके नियमित सेवन की सख्त हिदायत दी।
समाज के लिए संदेश
प्रवत का यह सफर सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का एक बड़ा संदेश है। यह साबित करता है कि सही समय पर रेस्क्यू, इलाज और पुनर्वास से कोई भी अपने अपनों तक लौट सकता है।