विरार: वसई-विरार शहर में बीते दिनों (4 से 8 जुलाई) हुई मूसलाधार बारिश और उसके बाद पैदा हुए भयानक बाढ़ के हालातों को लेकर स्थानीय राजनीति गरमा गई है। इस गंभीर आपदा और लचर जलनिकासी व्यवस्था पर आगामी 17 जुलाई को होने वाली वसई-विरार महानगरपालिका की महासभा में बेहद विस्तृत और तीखी चर्चा होने जा रही है। विपक्षी दलों द्वारा जनता से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर विशेष चर्चा की मांग की गई थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए महापौर अजीव पाटील ने महासभा के आधिकारिक एजेंडे में शामिल करने की मंजूरी दे दी है।
नीरी और आईआईटी की रिपोर्ट पर उठेगा सवाल, विपक्ष ने मांगा पाई-पाई का हिसाब
विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने महापौर को एक कड़ा पत्र लिखकर प्रशासन की तैयारियों और दावों को कटघरे में खड़ा किया है। विपक्ष का मुख्य ध्यान वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) और आईआईटी (IIT) द्वारा शहर की भौगोलिक स्थिति तथा ड्रेनेज सिस्टम पर तैयार की गई विशेष रिपोर्ट पर है।
विपक्षी नेताओं का सीधा सवाल है कि:
- इस विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने बीते वर्षों में जमीन पर क्या काम किया?
- बाढ़ नियंत्रण और नालों के सुदृढ़ीकरण के नाम पर अब तक कितने करोड़ रुपये खर्च किए गए?
- भविष्य में शहर को जलजमाव से मुक्ति दिलाने के लिए पालिका के पास क्या ठोस और स्थायी ब्लूप्रिंट है?
इसके अलावा, मॉनसून से पहले हुई नालों की सफाई के दावों की पोल खोलने, आपदा प्रबंधन विभाग की विफलता और बाढ़ पीड़ितों को राहत देने जैसे मुद्दों पर भी सदन में जोरदार बहस होने के आसार हैं।
टल गई थी 8 जुलाई की बैठक, अब बाढ़ समेत 12 बड़े प्रस्तावों पर होगा फैसला
“शहर में आई भारी तबाही के कारण ही 8 जुलाई को होने वाली इस महासभा को स्थगित करना पड़ा था। अब यह महत्वपूर्ण बैठक 17 जुलाई को दोपहर 3 बजे आयोजित की जा रही है, जहाँ जनता की सुरक्षा और जवाबदेही तय की जाएगी।” — सदन सचिवालय सूत्र
इस महा-बैठक में केवल बाढ़ ही नहीं, बल्कि शहर के विकास और कर्मचारियों से जुड़े 12 अन्य बेहद महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी मुहर लगनी है। इनमें पूर्व ग्राम पंचायत कर्मियों को पुरानी पेंशन का लाभ देने, दो सहायक आयुक्तों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS), पालिका के नए प्रशासनिक ढांचे को हरी झंडी, खेल प्रतियोगिताओं व राष्ट्रीय महापौर मैराथन के आयोजन को वित्तीय मंजूरी, पर्यावरण विभाग के लिए हाइड्रोलिक लैडर व आधुनिक वाहनों की खरीद, तथा नायगांव-बापाणे मार्ग पर बॉक्स कल्वर्ट निर्माण जैसे अहम बुनियादी ढांचे से जुड़े विषय शामिल हैं।