विरार:
वसई-विरार के नागरिकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रहे स्थानीय निवासियों ने पिछले सप्ताह ही भारी जलभराव का दंश झेला था। कई दिनों तक पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहा, लोग दाने-दाने और पीने के पानी के लिए तरसते रहे। अभी जिंदगी पटरी पर लौट ही रही थी कि महावितरण ने आम जनता पर तीन गुना बढ़े हुए बिजली बिल का परमाणु बम फोड़ दिया है।
मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट हुआ ध्वस्त (सब-हेडिंग)
बढ़ती महंगाई के इस दौर में एक आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है। विरार में रहने वाले एक पीड़ित नागरिक ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि जो व्यक्ति महीने में 20 हजार रुपये कमाता है, वह 7 हजार रुपये घर का किराया देता है। राशन में 5 हजार और बच्चों की पढ़ाई-ट्यूशन में 5 हजार खर्च हो जाते हैं। कुल मिलाकर 17 हजार रुपये तो अनिवार्य खर्च हैं। ऐसे में जो बिजली बिल पहले 1,500 रुपये आता था, वह नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद सीधे 4 हजार, 5 हजार और यहाँ तक कि 8 हजार रुपये तक आ रहा है। अब सवाल यह है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार इस भारी-भरकम बोझ को कैसे उठाए?
बिजली दफ्तरों में सुनवाई नहीं, जनता में आक्रोश (सब-हेडिंग)
हैरानी की बात यह है कि जब भुक्तभोगी नागरिक अपनी शिकायत लेकर बिजली विभाग के कार्यालय पहुँचते हैं, तो अधिकारी राहत देने के बजाय पहले पूरा बिल भरने का दबाव बनाते हैं। इसके बाद भी बिल कम होने की कोई गारंटी नहीं दी जाती। जब बढ़े हुए बिल का कारण पूछा जाता है, तो अधिकारियों द्वारा बिजली का अत्यधिक इस्तेमाल या अधिक यूनिट जैसे घिसे-पिटे बहाने बना दिए जाते हैं। महावितरण के इस अड़ियल रवैये से परेशान जनता अब आर-पार के मूड में है। ‘स्मार्ट मीटर हटाओ, बिजली बिल कम करो’ के नारों के साथ लोग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। इस पूरे विषय पर जब बिजली विभाग के आला अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
मामले पर सामाजिक और राजनीतिक दिग्गजों की तीखी प्रतिक्रियाएं (सब-हेडिंग)
इस गंभीर मुद्दे पर शहर के कई प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक चेहरों ने महावितरण को आड़े हाथों लिया है:
- विनायक खरडे (शंभूराजे मिशन): “महावितरण की यह अव्यवस्था कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुनियोजित लूट है। भ्रष्ट तंत्र और अधिकारियों की लापरवाही से यह गोरखधंधा चल रहा है। शासन को इस पर तुरंत सख्त एक्शन लेना चाहिए। इस पूरे मामले का सच सामने लाने के लिए एक स्वतंत्र और सक्षम ऑडिट के साथ-साथ जनहित याचिका (PIL) दायर करना बेहद जरूरी है।”
- चंद्रशेखर गुंजारी (मनसे उपशहर अध्यक्ष – नालासोपारा): “पिछले दो महीनों से शहर में अंधाधुंध बिजली कटौती की जा रही है। लोग बिना बिजली के रातें गुजार रहे हैं। ऊपर से पुराने सही मीटरों को हटाकर लोगों पर जबरन स्मार्ट मीटर थोपे जा रहे हैं, जिससे बिल दोगुना आ रहा है। महावितरण समय रहते इस जनाक्रोश को समझे, वरना महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के तीव्र और उग्र आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे।”
- रोहित रमेश सासणे (जिला सचिव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी): “यह सरासर अमानवीयता है। जब कई दिनों तक बाढ़ के कारण बत्ती गुल थी, तो मीटर कैसे चला? और जब मीटर बंद था, तो बिल डबल कैसे आया? यह जनता की जेब पर सरेआम डाका है। राकांपा इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी। हमारी मांग है कि बढ़े बिलों पर तुरंत रोक लगे, जांच हो और बिजली कटौती की अवधि का बिल माफ किया जाए। न्याय नहीं मिला तो हम सड़कों पर उतरेंगे।”
- गणेश शशिकांत लाड (संस्थापक/अध्यक्ष – उत्कृष्ट प्रतिष्ठान): “अंग्रेज चले गए लेकिन लगान की व्यवस्था आज भी जारी है। टैक्स और महंगाई के बोझ तले दबे गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों की सैलरी नहीं बढ़ रही, लेकिन बिल बढ़ रहे हैं। भारी बारिश के कारण पांच दिनों तक लोगों की मजदूरी कट गई, ऐसे में 10-15 हजार कमाने वाला व्यक्ति हजारों का बिजली बिल कैसे भरेगा? सरकार को इस गंभीर विषय पर तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।”