नालासोपारा क्षेत्र सहित वसई-विरार और मीरा-भाईंदर में लगातार बढ़ रहे नाबालिग बच्चों की गुमशुदगी के मामलों पर परिवर्तन फाउंडेशन ने गहरा दुख और चिंता जताई है। संस्था के सचिव शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक ज्ञापन भेजकर इन सभी संवेदनशील मामलों की गहन जांच एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के समन्वय से कराने की पुरजोर अपील की है।
स्थानीय पुलिस के साथ AHTU का समन्वय जरूरी
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सोमवंशी ने स्पष्ट किया कि हर गुमशुदगी का मामला मानव तस्करी से जुड़ा नहीं होता, लेकिन कई मामलों में स्थानीय नागरिकों द्वारा ऐसी गंभीर आशंकाएं जताई जा रही हैं। इसलिए, केवल स्थानीय पुलिस स्टेशन स्तर पर जांच सीमित रखने के बजाय विशेष रूप से प्रशिक्षित AHTU की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाना समय की मांग है।
डिजिटल साक्ष्यों और विशेष समीक्षा की मांग
परिवर्तन फाउंडेशन ने ज्ञापन के जरिए सरकार से कई प्रमुख मांगें की हैं:
- मामलों की विशेष समीक्षा: लंबित और नए सभी नाबालिगों के लापता होने के मामलों की उच्च स्तरीय समीक्षा हो।
- डिजिटल साक्ष्य का उपयोग: सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल ट्रैकिंग और अन्य डिजिटल तकनीकों की मदद से सर्च ऑपरेशन तेज किया जाए।
- विभागों में बेहतर तालमेल: स्थानीय पुलिस, बाल कल्याण समिति और महिला व बाल विकास विभाग के बीच मजबूत समन्वय स्थापित हो।
- जनजागरूकता अभियान: नागरिकों को संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्ट करने के लिए जागरूक किया जाए।
बच्चों की सुरक्षा हो सर्वोच्च प्राथमिकता
फाउंडेशन ने जोर देकर कहा कि बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासनिक स्तर पर त्वरित और कड़े कदम उठाए जाने की बेहद जरूरत है।