पटना:
बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान हुई फ़ायरिंग की घटना को लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर पहुँच गया है। 19 अगस्त 2026 को प्रस्तावित राजभवन मार्च से पहले, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रदेश की एनडीए सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए 15 तीखे सवाल दागे हैं। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘छात्र-छात्राओं के सवाल, सरकार दे जवाब!’ शीर्षक से पोस्ट साझा कर पुलिस की कार्रवाई, ऑटोमैटिक हथियारों के प्रयोग और प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
AK-47 के प्रयोग और कमांड चेन पर उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन से जवाब माँगते हुए पूछा कि छात्र प्रदर्शन जैसे नागरिक मामलों में AK-47 जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किसके कहने पर हुआ? उन्होंने सवाल उठाया कि निलंबित सिपाही को यह हथियार किस शस्त्रागार या यूनिट से जारी किया गया था और इसके लिए किस वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकृति दी थी?
आरजेडी नेता ने कहा कि जाँच की सुई केवल नीचे स्तर के जवान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हथियार जारी करने से लेकर फ़ायरिंग का आदेश देने वाली पूरी कमांड चेन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
एसपी पर कार्रवाई और रिकॉर्ड्स सार्वजनिक करने की माँग
भीड़ नियंत्रण के स्थापित नियमों (Crowd Management SOP) का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने पूछा कि जब प्रदर्शन में फ़ायरिंग की घटना हुई, तो संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) पर अब तक कोई प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
इसके साथ ही उन्होंने माँग की है कि:
- फ़ायरिंग से संबंधित हथियार और गोलियों के रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएँ।
- घटनास्थल पर मौजूद बॉडी कैमरा या अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग फुटेज को सामने लाया जाए।
- इस्तेमाल किए गए हथियारों की बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच कराकर रिपोर्ट पारदर्शी तरीके से जारी हो।
लालू यादव ने भी सरकार को घेरा, 19 अगस्त के मार्च से गरमाई सियासत
इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी युवाओं और छात्रों के आंदोलन का पूरा समर्थन किया था। लालू यादव ने राज्य में लगातार हो रहे पेपर लीक, लचर शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शी बहाली प्रक्रिया में विफलता और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दों पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की जायज़ माँगों को सुनने के बजाय दमनकारी नीतियाँ अपना रही है। 19 अगस्त के प्रस्तावित राजभवन मार्च से ठीक पहले विपक्षी नेताओं के इन कड़े बयानों से बिहार का राजनीतिक माहौल गरमा गया है।