रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ राजेश कोरी
वसई-विरार:
शहर की खस्ताहाल सड़कों और आए दिन होते घटिया पैचवर्क के विरोध में चल रहा ‘सड़क सत्याग्रह’ आंदोलन अब और आक्रामक हो गया है। वसई-विरार महानगरपालिका के आयुक्त पृथ्वीराज के साथ आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल की हुई बैठक बेनतीजा खत्म हो गई, जिसके बाद आंदोलन तेज करने का ऐलान किया गया है।
इस्तीफे की मांग पर अड़े आंदोलनकारी
बैठक के दौरान आंदोलनकारियों ने शहर अभियंता प्रदीप पचंगे के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाया। हालांकि, आयुक्त पृथ्वीराज ने स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी से जबरन इस्तीफा लेना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। आयुक्त ने भरोसा दिलाया कि सड़कों की मरम्मत का काम जारी है और इसे गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाएगा।
‘जनता के पैसों की बर्बादी’ का आरोप
सत्याग्रहियों ने आयुक्त के इस आश्वासन को खारिज करते हुए इसे अस्थायी समाधान बताया। उनका कहना है कि हर मानसून में सड़कें उखड़ जाती हैं और बार-बार पैचवर्क के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स का पैसा बर्बाद किया जा रहा है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
बैठक का सबसे संवेदनशील पहलू तब सामने आया जब आंदोलनकारियों के अनुसार, आयुक्त ने माना कि सड़कों की जर्जर स्थिति के लिए अकेले प्रदीप पचंगे नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था जिम्मेदार है। आंदोलनकारियों ने आयुक्त के इस बयान को अपनी मांगों का समर्थन माना है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
वार्ता विफल होने के बाद ‘सड़क सत्याग्रह’ टीम ने अपनी मांगों को और कड़ा कर दिया है। उनकी मुख्य मांगें हैं:
- पूरे प्रशासनिक ढांचे की जवाबदेही तय की जाए।
- घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
- सड़कों का निष्पक्ष थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट कराया जाए।
- सिटी इंजीनियर प्रदीप पचंगे को पद से हटाया जाए।
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