उचित सड़क न होने से रेलवे ट्रैक बना मजबूरी
वसई: विरार के पास स्थित वैतरणा और वाढीव बेट क्षेत्र के निवासियों को वर्षों बाद भी आवागमन का उचित साधन उपलब्ध नहीं हो पाया है। संपर्क मार्ग के अभाव में ग्रामीणों और स्कूली विद्यार्थियों को अपनी जान हथेली पर रखकर रेलवे ट्रैक और पुल से गुजरना पड़ रहा है। दैनिक जरूरतों के लिए वैतरणा स्टेशन तक पहुंचने का यही एकमात्र जरिया है।
DFC मालगाड़ियों से बढ़ा हादसे का डर, सिर पर सामान ढोने को मजबूर महिलाएं
क्षेत्र में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) चालू होने के बाद मालगाड़ियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, जिससे हादसे का जोखिम और बढ़ गया है। पटरियों से गुजरते समय ट्रेन आने पर लोगों के पास किनारे खड़े होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि पीने के पानी, राशन की बोरियों और एलपीजी सिलेंडरों को सिर पर लादकर रेलवे पुल से ले जाना पड़ता है।
सांसद डॉ. हेमंत सवरा ने लिया जायजा, दिए निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद डॉ. हेमंत सवरा ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों, विधायक राजन नाईक और भाजपा जिलाध्यक्ष प्रज्ञा पाटील के साथ मौके का निरीक्षण किया। सांसद ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वे वाढीव और वैतरणा को जोड़ने वाले पुल के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री व पालकमंत्री से चर्चा करेंगे। साथ ही स्थायी पुल बनने तक विकल्प के रूप में तुरंत फेरीबोट (नाव) सेवा शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। इस दौरान डहाणू वैतरणा प्रवासी सेवाभावी संस्था ने सुरक्षित पैदल मार्ग व यात्री सुविधाओं को लेकर ज्ञापन भी सौंपा।
(रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण, वसई)