---Advertisement---

भोयदापाड़ा कचरा प्रसंस्करण परियोजना घोटाले की परतें खंगालने की तैयारी: विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने मुख्यमंत्री से की सख्त जांच की मांग |

---Advertisement---

रिपोर्टर: साहिल यादव (मुंबई)

वसई-विरार शहर महानगरपालिका अंतर्गत भोयदापाड़ा (गोखिवरे) स्थित कचरा डंपिंग ग्राउंड में सामने आए बहुचर्चित कचरा प्रसंस्करण एवं बायो-माइनिंग परियोजना घोटाले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। इस कथित करोड़ों रुपये की धांधली के प्रकाश में आने के बाद भाजपा विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने मामले की व्यापक और पारदर्शी जांच की मांग तेज कर दी है। उन्होंने मंत्रालय में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से शिष्टाचार मुलाकात कर एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा, जिसमें जांच का दायरा बढ़ाने की पुरजोर अपील की गई।

FIR में 37.66 करोड़ का उल्लेख, 64 करोड़ की अनियमितता की आशंका विधायक स्नेहा दुबे पंडित के अनुसार, बोळींज पुलिस थाने में दर्ज FIR क्रमांक 0474/2026 में केवल फर्जी RDF (Refuse-Derived Fuel) प्रमाणपत्रों के जरिए करीब 37.66 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का जिक्र है। हालांकि, जमीनी सच्चाई और प्राथमिक आंकड़ों को देखते हुए इस पूरे घोटाले में लगभग 64 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक गड़बड़ी की मजबूत संभावना है। इसलिए पुलिस को एक पूरक शिकायत (Supplementary FIR) दर्ज कर मामले के सभी वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं को जांच में शामिल करना चाहिए।

फर्जी बिलों से लेकर प्राकृतिक संसाधनों के अवैध उत्खनन तक के गंभीर आरोप सौंपे गए पत्र में निविदा (Tender) प्रक्रिया, ठेकेदार की पात्रता, कार्यादेश की शर्तों के उल्लंघन, और कचरे की घनता 340 से फर्जी तरीके से बढ़ाकर 480 किलो प्रति घनमीटर दिखाकर तैयार किए गए बिलों की गहराई से जांच की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, डंपिंग ग्राउंड स्थल पर फर्जी RDF प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल, प्राकृतिक पत्थरों के अवैध उत्खनन और पर्यावरण नियमों के सरेआम उल्लंघन जैसे गंभीर मुद्दों को भी जांच के दायरे में लाने की बात कही गई है।

स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट और संपत्ति जब्ती से भरपाई की उठी मांग विधायक ने केवल ठेकेदारों पर कार्रवाई तक सीमित न रहकर महानगरपालिका के दोषी अधिकारियों, इंजीनियरों, तकनीकी सलाहकारों और भुगतान को मंजूरी देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने वर्ष 2023 से अब तक हुए तमाम भुगतानों का एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अपराध साबित होने पर दोषियों की चल-अचल संपत्ति और बैंक खातों को कानूनन फ्रीज और जब्त कर महानगरपालिका को हुए वित्तीय नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई की जानी चाहिए।

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---
Rajesh