तृप्ति प्रमाण ब्यूरो चीफ विनोद प्रसाद
पटना। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से अहसास कलाकृति की ओर से हास्य-व्यंग्य नाटक ‘चमगादड़ की रात’ का प्रभावशाली मंचन प्रेमचंद रंगशाला सभागार में किया गया। डॉ. प्रमोद कुमार सिंह द्वारा लिखित और कुमार मानव द्वारा निर्देशित इस नाटक ने हास्य के साथ सत्ता की चाटुकारिता, राजनीतिक स्वार्थ और सरकारी व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया। प्रस्तुति के दौरान दर्शक कई प्रसंगों पर जमकर हंसे, वहीं नाटक ने उन्हें सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर गंभीरता से सोचने के लिए भी प्रेरित किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय जीवन बीमा निगम, पटना शाखा-3 के मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार, मुख्य अतिथि प्रो. कमल प्रसाद बौद्ध, निदेशक, बुद्धा स्टडीज़ एंड एडवांस्ड रिसर्च सेंटर, पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी, विशिष्ट अतिथि प्रमोद कुमार सिंह, अधिवक्ता, पटना उच्च न्यायालय तथा वरिष्ठ रंगकर्मी और बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त अवर सचिव सैयद अता करीम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
नाटक की कहानी एक ऐसे गांव से शुरू होती है, जहां अंधेपन की समस्या से परेशान ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर सत्ता के दरबार में पहुंचते हैं। वहां उनका सामना राजा सिलसिला से होता है, जिसे जनता की समस्याओं से ज्यादा अपनी प्रशंसा और चाटुकारिता पसंद है। समस्या के समाधान के लिए गठित आयोग बैठकों और कागजी कार्रवाई में उलझ जाता है। व्यंग्य का चरम तब सामने आता है, जब अंधों की संख्या 60 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत होने की रिपोर्ट आती है और राजा शेष 20 प्रतिशत लोगों की आंखें भी बंद कर देने का आदेश देता है। बाद में जब स्वयं राजा देखने में असमर्थ हो जाता है, तो व्यवस्था की विडंबना और भी हास्यास्पद रूप में सामने आती है तथा उसके अंधेपन की जांच के लिए एक नया आयोग गठित करने की घोषणा होती है।

राजा सिलसिला की भूमिका में निर्देशक कुमार मानव ने प्रभावशाली अभिनय किया। शंकर के किरदार में विजय कुमार चौधरी ने सशक्त संवाद अदायगी से दर्शकों को प्रभावित किया। वहीं सदानंद के रूप में भुवनेश्वर कुमार और मदारी की भूमिका में सरबिंद कुमार विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। रामभरोसे के रूप में बलराम कुमार, वाटिका की भूमिका में अर्चना कुमारी और पुष्पा के किरदार में विजया लक्ष्मी ने भी प्रभावी अभिनय किया। अन्य भूमिकाओं में राज किशोर पासवान, मयंक कुमार, संतोष कुमार, रविदास, निरंजन कुमार ‘छुच्छे’, अभिमन्यु कुमार, मंतोष कुमार, रामबाबू राम, आर्यन कुमार गुप्ता, करण कुमार और सूरज कुमार ने योगदान दिया।
मंच के पीछे की टीम ने भी प्रस्तुति को जीवंत बनाने में अहम भूमिका निभाई। मंच संचालन मानसी कुमारी, प्रकाश परिकल्पना राजीव रॉय, मंच परिकल्पना संतोष कुमार एवं सुनील कुमार, रूपसज्जा माया कुमारी, वस्त्र विन्यास अनिता कुमारी और पार्श्वध्वनि की जिम्मेदारी मानसी कुमारी ने संभाली।
नाटक का केंद्रीय संदेश यह रहा कि अंधापन केवल आंखों का नहीं होता। सच सामने होते हुए भी उसे देखने और स्वीकार करने का साहस न होना भी सामाजिक और मानसिक अंधेपन का एक रूप है। प्रस्तुति के समापन पर दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय, संवाद, निर्देशन और व्यंग्यात्मक शैली की सराहना की। ‘चमगादड़ की रात’ मनोरंजन के साथ व्यवस्था और सामाजिक सोच पर एक गंभीर सवाल छोड़ गया।




