दिलजीत दोसांझ ने वैश्विक मंच पर पंजाबी संस्कृति को दिलाई नई पहचान: अंजलि फौगाट |

Share:

फैशन डिजाइनर अंजलि फौगाट ने की दिलजीत के मेट गाला लुक की सराहना, कहा—अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी हासिल की जा सकती है वैश्विक पहचान

रिपोर्ट: साहिल यादव | राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक तृप्ति प्रमाण

मनोरंजन। पंजाबी संगीत और सिनेमा से अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता एवं गायक दिलजीत दोसांझ ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने में अहम भूमिका निभाई है। उनके फैशन अंदाज और पारंपरिक पंजाबी पहचान को दुनिया के सामने पेश करने के तरीके की फैशन डिजाइनर अंजलि फौगाट ने सराहना की है। उनका मानना है कि दिलजीत केवल पंजाबी फैशन को अंतरराष्ट्रीय मंच तक नहीं ले जा रहे, बल्कि अपनी संस्कृति और विरासत को भी नई पहचान दिला रहे हैं।

अंजलि फौगाट के मुताबिक, दिलजीत दोसांझ का मेट गाला लुक उनके लिए खास महत्व रखता है। इस परिधान की सबसे बड़ी विशेषता उसका प्रतीकात्मक संदेश था। उन्होंने खास तौर पर परिधान के पीछे लिखे ‘मैं हूं पंजाब’ शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संदेश ने बिना कुछ बोले ही अपनी संस्कृति और पहचान के प्रति गर्व को जाहिर किया।

परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम

अंजलि फौगाट का मानना है कि दिलजीत के पहनावे में शामिल पगड़ी, आभूषण, तलवार और पारंपरिक तत्व केवल सजावट का हिस्सा नहीं थे, बल्कि इनके माध्यम से पंजाब की विरासत और इतिहास को दर्शाया गया। उनके अनुसार, फैशन की असली खूबसूरती तभी सामने आती है, जब वह परंपरा और आधुनिकता के बीच एक मजबूत सेतु का काम करे।

उन्होंने अपने फैशन ब्रांड डिजाइनर ड्रीम कलेक्शन के संदर्भ में भी भारतीय विरासत को अंतरराष्ट्रीय फैशन की भाषा में प्रस्तुत करने की सोच साझा की। उनका कहना है कि अपनी संस्कृति का सम्मान करने का अर्थ अतीत तक सीमित रहना नहीं है। व्यक्ति अपनी जड़ों से जुड़ा रहकर भी भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा सकता है।

फैशन से आगे है दिलजीत का प्रभाव

अंजलि फौगाट के अनुसार, दिलजीत दोसांझ की लोकप्रियता केवल उनके पहनावे, संगीत या अभिनय तक सीमित नहीं है। उनके व्यक्तित्व में सकारात्मकता, सहजता और जमीन से जुड़े रहने का भाव भी दिखाई देता है। उन्होंने दिलजीत के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सार्वजनिक छवि के पीछे एक शांत और सकारात्मक सोच नजर आती है।

अंजलि का मानना है कि दिलजीत की खासियत यह है कि वह दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी सांस्कृतिक पहचान को पीछे नहीं छोड़ते। वह अपने संगीत, पहनावे और प्रस्तुति के जरिए पंजाबी संस्कृति को जीवंत रूप में सामने रखते हैं।

नई पीढ़ी तक पहुंच रही पंजाबी संस्कृति

अंजलि फौगाट ने दिलजीत की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी बेटी गायिका बनना चाहती है और भारतीय कलाकारों में वह दिलजीत दोसांझ तथा शाहरुख खान को पहचानती है। उनके अनुसार, यह किसी कलाकार की सांस्कृतिक पहुंच और प्रभाव को समझने का एक उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि जब कोई कलाकार अलग-अलग देशों, पीढ़ियों और संस्कृतियों के लोगों के बीच अपनी पहचान बना लेता है और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा देता है, तो उसका प्रभाव मनोरंजन से कहीं आगे बढ़ जाता है।

अंजलि फौगाट के विचार में, दिलजीत दोसांझ ने यह साबित किया है कि वैश्विक पहचान बनाने के लिए अपनी संस्कृति से दूरी बनाना जरूरी नहीं है। कई बार अपनी परंपराएं, भाषा और सांस्कृतिक विरासत ही दुनिया का ध्यान आकर्षित करने की सबसे बड़ी ताकत बन जाती हैं।

निष्कर्षतः, दिलजीत दोसांझ की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय संस्कृति और वैश्विक पहचान एक साथ आगे बढ़ सकती हैं। उनकी सफलता ने पंजाबी विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने के साथ-साथ भारतीय कलाकारों के लिए भी एक नई संभावना को रेखांकित किया है।

Share: