नेचुरोपैथी

केला – स्वास्थ्य का खजाना | डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी |


केला एक ऐसा फल है जो 12 महीने उपलब्ध रहता है। इसकी मोती जैसी छाल आसानी से उतर जाती है। पकने के बाद यह ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता।

केला न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि पोषण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई परीक्षणों से यह साबित हो चुका है कि केला कई बीमारियों में भी लाभदायक है।

इसमें विटामिन A, C, थियामिन, रिबोफ्लेविन, नियासिन और 11 खनिज तत्व होते हैं। कैलोरी आलू से भी अधिक होती है।

केला बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। 6 महीने से लेकर 2 साल तक के बच्चों को छानकर दिया जा सकता है।

न्यूयॉर्क के कई अस्पतालों में बच्चों को केला खिलाने का नियम बना लिया गया है।

केले में पेक्टिन होता है, जो पाचन में सहायता करता है और आंतों को साफ करता है।

कार्बोहाइड्रेट की अधिकता और प्रोटीन व वसा की कमी के कारण केला सभी उम्र के लोगों के लिए लाभदायक है।

केला वजन बढ़ाने और घटाने में भी मदद करता है। स्वादिष्ट होने के कारण लोग इसे अधिक खाते हैं।

नोट: केला खाने के बाद एक छोटी हरी इलायची खाने से केला बहुत जल्दी पच जाता है।


डॉ. मीना अग्रवाल, आगरा

मीना अग्रवाल

नमस्कार! मैं मीना अग्रवाल, एक प्रोफेशनल नेचुरोपैथी विशेषज्ञ, और मेरा लक्ष्य है लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने में मदद करना। मेरा मानना है कि हमारा शरीर खुद को ठीक करने की अद्भुत क्षमता रखता है, बस हमें उसे सही पोषण, सही वातावरण और सही देखभाल देने की जरूरत होती है।