पालघर, 3 जून 2026: पालघर जिले की जव्हार एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना (आईटीडीपी) ने आदिवासी कल्याण के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट सेवाओं से देश भर में अपनी पहचान बनाई है। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इस परियोजना को “सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना” के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया है। इस उपलब्धि के तहत परियोजना को 5 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई है।
राष्ट्रपति के करकमलों से मिला सम्मान
यह गौरवशाली सम्मान “आईटीडीए और आईटीडीपी का सुदृढ़ीकरण” विषय पर आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया। इस विशेष समारोह में भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही और उन्होंने स्वयं इस पुरस्कार का वितरण किया।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही उपस्थिति
पुरस्कार समारोह में जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा, अपर सचिव मनीष ठाकुर, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी और विभिन्न राज्यों के आला अधिकारी मौजूद रहे। जव्हार परियोजना की ओर से परियोजना अधिकारी डॉ. अपूर्वा बासुर, सहायक परियोजना अधिकारी मच्छिंद्र गडाख और नियोजन अधिकारी सतीश रास्ते ने यह गौरवशाली पुरस्कार ग्रहण किया।
क्यों मिला यह प्रतिष्ठित पुरस्कार?
आदिवासी समुदाय के समग्र विकास के लिए परियोजना द्वारा लागू की गई नवाचारी योजनाओं, प्रभावशाली अमल, लाभार्थियों को केंद्र में रखकर चलाई गई पहलों और उत्कृष्ट प्रशासनिक कार्यप्रणाली को देखते हुए जूरी ने इस परियोजना को यह राष्ट्रीय सम्मान देने का निर्णय लिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पालघर जिले ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र राज्य में खुशी और गर्व का माहौल है।