पटना/बोधगया (तृप्ति प्रमाण ब्यूरो)
मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रकोष्ठ एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 18 अप्रैल 2026 को यूजीसी-सारथी गतिविधि कैलेंडर, 2026 के आलोक में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मन्नू लाल सेंट्रल लाइब्रेरी के सेमिनार हॉल में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का प्रारंभ परंपरागत दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर आईक्यूएसी समन्वयक प्रोफेसर मुकेश कुमार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति समन्वयक डॉक्टर प्रियंका सिंह, सारथी समन्वयक डॉक्टर एकता वर्मा, सारथी मेंटर डॉक्टर ममता मेहरा तथा आमंत्रित वक्ता डॉक्टर सुमित कुमार और डॉक्टर रवि कुमार सिंह मंच पर उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भाग लिया।
विषय और प्रस्तुति का महत्व
इस विशेष व्याख्यान का विषय “डिजिटल साक्षरता एवं नवाचार: एबीसी के विशेष संदर्भ में” रखा गया था, जो वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है। आमंत्रित वक्ताओं ने डिजिटल साक्षरता के विकास, इसके महत्व और नवाचार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। साथ ही, एबीसी प्रणाली की कार्यप्रणाली को सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग, क्रेडिट ट्रांसफर प्रणाली की उपयोगिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों के बारे में जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों ने विषय से संबंधित प्रश्न भी रखे, जिनका संतोषजनक उत्तर वक्ताओं द्वारा दिया गया।
कार्यक्रम में सहयोग और सम्मान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सारथी टीम के सदस्य सौरभ कुमार, अंकुश कुमार, प्रेम कुमार, सुमीत कुमार, राजलक्ष्मी और छोटू प्रसाद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के समापन चरण में यूजीसी-सारथी गतिविधि कैलेंडर 2026 के अनुसार मार्च माह में आयोजित गतिविधियों में विजेता छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉक्टर तरन्नुम जहां, डॉक्टर दिव्या मिश्रा, डॉक्टर कविता, डॉक्टर पूनम सिंह सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर ममता मेहरा द्वारा किया गया तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति समन्वयक डॉक्टर प्रियंका सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
शैक्षणिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल साक्षरता आज के समय में शिक्षा के क्षेत्र में एक आवश्यक कौशल बन गया है। एबीसी प्रणाली के माध्यम से छात्र विभिन्न संस्थानों से क्रेडिट अर्जित कर अपनी शैक्षणिक यात्रा को लचीला बना सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम छात्रों को नई शैक्षणिक नीतियों और डिजिटल उपकरणों से परिचित कराने में सहायक सिद्ध होते हैं।