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महाराष्ट्र को जलसमृद्ध बनाने का संकल्प: CM देवेंद्र फडणवीस ने की अहम बैठक, सिंचाई परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश |

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मुंबई संवाददाता | तृप्ति प्रमाण

मुंबई। महाराष्ट्र को पूरी तरह से जलसमृद्ध बनाने और राज्य की सिंचाई क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। मुंबई स्थित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पर सीएम देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में जलसंपदा विभाग के कामकाज और प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं और ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ अभियान के तहत जारी जल परियोजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा की गई।

समयसीमा और पारदर्शिता पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि राज्य में सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार धन की कोई कमी नहीं होने दे रही है। बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया जा रहा है, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी परियोजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ तय समयसीमा के भीतर मुकम्मल की जाएं।

बैठक के दौरान राज्य की कई प्रमुख नदी जोड़ परियोजनाओं जैसे – नारपार-गिरणा, दमनगंगा-एकदरे-गोदावरी, दमनगंगा-वैतरणा-गोदावरी, कोंकण उल्हास-वैतरणा और गोदावरी बेसिन नदी जोड़ परियोजना की मौजूदा प्रगति का जायजा लिया गया।

8 जिलों के 6 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को मिलेगा लाभ

समीक्षा के दौरान वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड़ परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया। इस योजना के तहत 63.74 टीएमसी अतिरिक्त पानी को बुलढाणा जिले के नलगंगा उपखोरे की तरफ मोड़ने का प्रस्ताव है। इस ऐतिहासिक कदम से राज्य के 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने लगेगी। इस बड़ी परियोजना का सीधा फायदा विदर्भ और आसपास के 8 प्रमुख जिलों – भंडारा, नागपुर, वर्धा, अमरावती, यवतमाल, अकोला, बुलढाणा और वाशिम को मिलेगा।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में तेजी

बैठक में मिले आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत महाराष्ट्र में अब तक 20 महत्वपूर्ण परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं, जबकि 7 पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। मार्च 2026 तक राज्य अपनी 74 फीसदी (यानी करीब 4.30 लाख हेक्टेयर) सिंचाई क्षमता का विकास कर चुका है।

इस पूरी योजना के दायरे में 29 बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाएं आती हैं, जिनकी कुल लागत 24,721 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार की तरफ से 4,288 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसका अंतिम लक्ष्य 5.79 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता को विकसित करना है।

विदर्भ-मराठवाड़ा के किसानों को बड़ी राहत

इसके अतिरिक्त, ‘बळीराजा जलसंजीवनी योजना’ के तहत विदर्भ और मराठवाड़ा के किसानों को सूखे की मार से बचाने के लिए 8 बड़ी-मध्यम और 83 लघु सिंचाई परियोजनाओं पर तेजी से काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस उच्च स्तरीय बैठक में जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, मंत्री गिरीश महाजन और विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि इन जल परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन ही राज्य के कृषि विकास और दीर्घकालिक जल सुरक्षा की असली कुंजी है।

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Rajesh