मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए 36,585 करोड़ रुपये की कर्जमाफी योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि यह राज्य के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी कर्जमाफी है, जिसका सीधा लाभ लगभग 56 लाख किसानों को मिलेगा।
राजनीतिक नहीं, राहत का माध्यम है योजना
विधानमंडल के मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर आयोजित पत्रकार परिषद में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कर्जमाफी सरकार के लिए कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह संकटग्रस्त किसानों को राहत देने का एक माध्यम है। किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उन्हें पुनः ऋण प्राप्त करने योग्य बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर पात्रता के मानदंड तय किए गए हैं, और योजना की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की एक उपसमिति गठित की गई है।
महिला किसानों को मिलेगा कानूनी दर्जा
आगामी मानसून सत्र में लगभग 10 महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। इनमें महिला किसानों को कानूनी रूप से ‘किसान’ का दर्जा देने वाला विधेयक सबसे अहम माना जा रहा है। इसके लागू होने के बाद महिला किसानों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ सीधे तौर पर मिल सकेगा।
कमजोर मानसून को लेकर चिंता
राज्य में मानसून की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जून में अब तक सामान्य से करीब 80 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसीलिए किसानों से जल्दबाजी में बुवाई न करने की अपील की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 23 जून से कोंकण क्षेत्र में बारिश बढ़ने की संभावना है, जबकि विदर्भ और मराठवाड़ा में पर्याप्त वर्षा के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है। किसानों को कम से कम 100 मिमी बारिश होने के बाद ही बुवाई करने की सलाह दी गई है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य की तिजोरी पर पहला अधिकार किसानों का है। वहीं, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि महिला किसानों को अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मानसून सत्र में अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोगों में उपाध्यक्ष पद सृजन, रोजगार गारंटी कानून, महानगरपालिका कानून, निजी कौशल विश्वविद्यालय और जीएसटी संशोधन समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है।