वसई: दिनभर की हाड़तोड़ मेहनत और लोकल ट्रेनों की गंतव्य यात्रा के बाद भी वसई पूर्व के नागरिकों को राहत नहीं मिल रही है। वसई पूर्व रेलवे स्टेशन के बाहर रोजाना हजारों यात्रियों को ऑटो रिक्शा पाने के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। सबसे बदतर स्थिति वसंत नगरी और एवरशाइन सिटी की ओर जाने वाले यात्रियों की है, जिन्हें पीक आवर्स के दौरान स्टेशन से बाहर निकलते ही रिक्शे के इंतजार में 1 घंटे से अधिक समय गंवाना पड़ रहा है।
नौकरीपेशा, महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़ी फजीहत
भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन के थकाऊ सफर के बाद स्टेशन पहुंचते ही ऑटों की भारी किल्लत लोगों के सब्र का इम्तिहान ले रही है। इस लचर व्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा दफ्तर से लौटने वाले कर्मचारियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। घंटों लाइन में खड़े रहने से लोग देर से घर पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और मानसिक सुकून पर बुरा असर पड़ रहा है।
सख्त कार्रवाई और VVMC बसें बढ़ाने की मांग
यात्रियों की इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक संस्थाओं ने मोर्चा खोल दिया है। ‘MH48 एक्शन काउंसिल’ और ‘वसई साउथ इंडियन काउंसिल’ ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO), ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। संगठनों ने मांग रखी है कि:
- पीक आवर्स के दौरान स्टेशन परिसर में अधिकृत ऑटो रिक्शा की संख्या बढ़ाई जाए।
- भाड़ा नकारने (रिफ्यूज़ल) वाले अड़ियल ऑटो चालकों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) द्वारा इन मार्गों पर बस फेरियों की संख्या में तुरंत इजाफा किया जाए।
प्रशासनिक समन्वय से निकलेगा समाधान
MH48 एक्शन काउंसिल के जोसेफ वर्गीस और वसई साउथ इंडियन काउंसिल के रेजी कुरियन ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि यदि आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय निकाय आपस में समन्वय बनाकर सटीक योजना लागू करें, तो वसंत नगरी व एवरशाइन सिटी के हजारों नागरिकों को इस दैनिक प्रताड़ना से निजात मिल सकती है। उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की गुहार लगाई है।
(रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण)