नागपुर:
अंतरराष्ट्रीय व्याघ्र दिवस 2026 के खास मौके पर उपराजधानी नागपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में बाघों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की खाद्य श्रृंखला को संतुलित रखने में बाघों की केंद्रीय भूमिका है। इसी को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर बाघ संरक्षण व्यवस्था को नई मजबूती दे रही है।
एआई (AI) और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम से रखी जा रही नज़र
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि टाइगर रिजर्व क्षेत्रों के आसपास के गांवों में मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले टकराव को न्यूनतम करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाए जा रहे हैं। वन विभाग द्वारा कैमरा ट्रैकिंग के साथ-साथ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ लागू किया गया है, जो जंगलों से सटे इलाकों में बाघों की आवाजाही की समय पर सूचना देकर हादसों को टालने में कारगर साबित हो रहा है। इसके अलावा टाइगर रिजर्व से सटे गांवों के लोग स्वेच्छा से पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
बाघों की आबादी बढ़ाने में भारत और नेपाल अव्वल
वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के कुल बाघों की आबादी का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है। विश्व स्तर पर तय लक्ष्यों के अनुसार बाघों की संख्या में वृद्धि हासिल करने में केवल भारत और नेपाल ही सफल रहे हैं। इस मामले में महाराष्ट्र की प्रगति भी उल्लेखनीय रही है और राज्य में बाघों का कुनबा लगातार फल-फूल रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बाघों को बचाना सिर्फ वन विभाग का काम नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का सामूहिक उत्तरदायित्व है।
बाघ संरक्षण के लिए ‘पंचसूत्री’ मॉडल का ऐलान
कार्यक्रम के दौरान राज्य में बाघ संरक्षण को नई दिशा देने के लिए एक विशेष ‘पंचसूत्री योजना’ का शुभारंभ किया गया। इस योजना के मुख्य पांच स्तंभ निम्नलिखित हैं:
- मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर लगाम लगाना।
- टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए हरित आजीविका (Green Livelihood) के अवसर पैदा करना।
- सीएसआर (CSR) फंड के जरिए संरक्षण कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना।
- एक सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन नीति लागू करना।
- वाइल्डलाइफ टूरिज्म से प्राप्त राजस्व का सीधा उपयोग वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में करना।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य मंत्री गणेश नाईक, राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर, राज्यमंत्री आशिष जयस्वाल, विधायक सुमित वानखेडे के साथ-साथ भूटान, कंबोडिया और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के राजनयिक व प्रतिनिधि भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
(रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण)