वसई:
महाराष्ट्र सरकार द्वारा परमिट धारक गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के बाद वसई-विरार क्षेत्र में रिक्शा चालकों के बीच भाषा सीखने की ज़बरदस्त होड़ देखने को मिल रही है। 15 अगस्त की अंतिम समय सीमा नजदीक आते ही प्रशिक्षण केंद्रों पर चालकों का तांता लग गया है। पिछले दो महीनों के भीतर केवल वसई-विरार क्षेत्र से ही 7,000 से अधिक चालकों ने मराठी बोलने का प्रशिक्षण पूरा कर मौखिक परीक्षा पास कर ली है।
4 घंटे की मुफ्त ट्रेनिंग, 2-3 दिनों में दी जा रही सुविधा
राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत 1 जून से परिवहन विभाग, कोकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क मराठी भाषा केंद्र चलाए जा रहे हैं। यहाँ चालकों को यात्रियों से सामान्य संवाद और व्यवहारिक मराठी भाषा का 4 घंटे का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भीड़ और मांग को देखते हुए पहले 7 दिनों में पूरा होने वाला यह कोर्स अब 2 से 3 दिनों में पूरा कराया जा रहा है, और नए अतिरिक्त केंद्र भी शुरू किए गए हैं।
परमिट रद्द होने के डर से केंद्रों पर उमड़ी भीड़
वसई, नालासोपारा, विरार और नायगांव क्षेत्र में बड़ी संख्या में अन्य राज्यों से आए चालक ऑटो चलाते हैं। पालघर जिला समन्वयक सीमा पाटिल और प्रशिक्षकों का कहना है कि 15 अगस्त तक प्रमाणपत्र जमा न करने पर लाइसेंस/परमिट रद्द होने की आशंका के कारण चालक तेज़ी से प्रशिक्षण ले रहे हैं।
‘तृप्ति प्रमाण’ की रिपोर्ट के अनुसार, मराठी सीखने को लेकर चालकों में भारी उत्साह है और हजारों की संख्या में ऑटो चालक प्रतिदिन केंद्रों पर पहुंचकर सफलतापूर्वक परीक्षा दे रहे हैं।