वसई:
मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग समेत वसई-विरार शहर के विभिन्न आंतरिक क्षेत्रों में अवैध निर्माण मलबा (डेब्रिज) डंप किए जाने की समस्या बेहद विकराल रूप ले चुकी है। वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा ठोस कार्ययोजना और कड़ी कार्रवाई के दावे तो किए गए थे, लेकिन धरातल पर कड़ाई न होने के कारण पूरा क्षेत्र मलबे के ढेर में तब्दील होता जा रहा है।
रात के अंधेरे में हाईवे और खाली प्लॉटों पर फेंका जा रहा मलबा
मुंबई और आस-पास के इलाकों में चल रहे री-डेवलपमेंट व निर्माण कार्यों से निकलने वाला वेस्ट निर्धारित डंपिंग यार्ड में भेजने के बजाय रात के सन्नाटे में यहाँ ठिकाने लगाया जा रहा है। वर्सोवा पुल, ससूनवघर, मालजीपाड़ा, चिंचोटी, नायगांव, सातीवली फाटा, पेल्हार और विरार तक हाईवे के किनारे मलबे के पहाड़ खड़े हो गए हैं। इससे शहर की सुंदरता तो खराब हो ही रही है, साथ ही प्राकृतिक नालों का प्रवाह रुकने से मानसूनी बारिश में भयंकर जलभराव और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
विभागीय तालमेल की कमी से बेखौफ भू-माफिया
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि जिलाधिकारी के आदेश पर वर्सोवा ब्रिज के पास चेक पोस्ट बनाई गई थी, जहाँ पुलिस, राजस्व विभाग, NHAI और मनपा को मिलकर संयुक्त चेकिंग करनी थी। लेकिन आपसी समन्वय के अभाव में मलबा ढोने वाले डंपरों पर कोई ठोस लगाम नहीं लग सकी।
NHAI के प्रबंधक सुहास चिटणीस ने स्पष्ट किया कि हाईवे से मलबा हटाकर जुर्माना तो लगाया जाता है, पर जब तक सभी एजेंसियां एक साथ सख्त रुख नहीं अपनाएंगी, तब तक यह अवैध धंधा बंद नहीं होगा। वहीं मनपा के अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाडे का कहना है कि मलबा नियंत्रण के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, लेकिन फिलहाल कर्मचारियों के SIR ड्यूटी में व्यस्त होने से अभियान थोड़ा सुस्त पड़ा है। कार्य पूरा होते ही दोबारा व्यापक कार्रवाई की जाएगी।
‘कचरा भूमि’ बनने की कगार पर वसई-विरार
‘तृप्ति प्रमाण’ की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का आरोप है कि प्लॉट फिलिंग के नाम पर मिट्टी की जगह खतरनाक कंस्ट्रक्शन वेस्ट डाला जा रहा है, जिससे जमीन की पानी सोखने की क्षमता खत्म हो रही है। यदि इस माफिया राज पर तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वसई-विरार जल्द ही पूरी तरह “कचरा भूमि” बनकर रह जाएगा।