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ट्रांसजेंडर समुदाय का पटना में मशाल जुलूस, 2026 संशोधन कानून पर जताई आपत्ति |

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तृप्ति प्रमाण ब्यूरो, पटना
बिहार की राजधानी पटना के कारगिल चौक पर बुधवार शाम ट्रांसजेंडर समुदाय ने ‘ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन अधिनियम 2026’ के खिलाफ शांतिपूर्ण मशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शन में ट्रांसजेंडर पुरुष, महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा
प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध संशोधन प्रस्ताव में जेंडर पहचान के लिए मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रमाण प्रस्तुत करने की अनिवार्यता को लेकर है। समुदाय का कहना है कि यह प्रावधान उनकी अस्मिता, निजता और गरिमा से जुड़े अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। प्रदर्शन में समुदाय के सदस्यों ने इस नियम को तुरंत वापस लेने की मांग रखी।
नेताओं का कहना
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं ट्रांसजेंडर नेता रेशमा प्रसाद ने कहा कि 15 अप्रैल 2014 को सुप्रीम कोर्ट के नालसा (NALSA) फैसले ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्वयं की जेंडर पहचान चुनने का संवैधानिक अधिकार प्रदान किया था। उन्होंने बताया कि 2019 में बने कानून ने शिक्षा, रोजगार और सामाजिक पहचान के नए अवसर उपलब्ध कराए, लेकिन 2026 का प्रस्तावित संशोधन इस दिशा में प्राप्त प्रगति को प्रभावित कर सकता है।
रेशमा प्रसाद ने प्रश्न उठाया कि जब पुरुष और महिलाओं की पहचान के लिए किसी मेडिकल बोर्ड की आवश्यकता नहीं होती, तो ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए यह बाध्यता क्यों? उन्होंने भारतीय परंपराओं में अर्धनारीश्वर, मोहिनी, बृहन्नला और शिखंडी जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐतिहासिक रूप से जेंडर पहचान को समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा गया है।


समुदाय की मांग
प्रदर्शन में शामिल निधि गुप्ता ने कहा कि समाज में पहले से मौजूद चुनौतियों के बीच पहचान प्रमाणन की अतिरिक्त बाध्यता समुदाय के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। नम्रता और स्वीटी कुमारी ने कहा कि समुदाय की मर्यादा और अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार को इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रखीं और स्पष्ट किया कि यदि उनकी बात पर उचित विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने का विकल्प खुला रहेगा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने पर बताया गया कि प्रस्तावित संशोधन पर विभिन्न पक्षों की राय ली जा रही है और अंतिम निर्णय विधायी प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा।

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Rajesh